मुख्यमंत्री के फैसलों से लोगों में रोष है। वर्ष 2010 में राष्ट्र विरोधी प्रदर्शन कराने के मास्टरमाइंड मसर्रत की रिहाई से गुस्साए लोगों ने मुख्यमंत्री का पुतला जलाकर रोष जताया। इस दौरान जमकर नारेबाजी की। साथ भाजपा को भी आड़े हाथों लिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि पीडीपी देश विरोधी लोगों को रिहा करा कर राजनीतिक रोटियां सेकने में लगी है।
किसान नेता सुभाष दषगोत्रा ने कहा कि कट्टर हुर्रियत नेता मसर्रत आलम को रिहा करने का फैसला देश हित में नहीं है। सुशील गुप्ता, छज्जू राम, सूरजीत मल्होत्रा, रतन लाल का कहना था कि भाजपा को पीडीपी के नेताओं पर दबाव बनाकर ऐसे लोगों को रिहा करने से रोकना चाहिए या फिर सरकार से समर्थन वापस लेना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भाजपा नेताओं ने लोगाें के जनादेश की अनदेखी कर सरकार बनाई है। कहा कि भाजपा ने जम्मू संभाग के लोगों से विश्वासघात किया है। प्रदर्शन कर रहे लोगाें का कहना है कि अगर इसी तरह अलगाववादी नेताओं और आतंकियाें को रिहा किया जाता रहा, तो लोग सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होेंगे।