उधमपुर में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे एनीमिया का शिकार हो रहे हैं। डाक्टरों के अनुसार संतुलित आहार नहीं लेने के कारण ही बच्चे और महिलाएं एनीमिया का शिकार हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार उधमपुर में महिलाएं और बच्चे ज्यादा एनीमिया का शिकार हो रहे हैं।
2013 में पूरे जिले में 2775 एनीमिया के मामले सामने आए, जिनमें 97 गर्भवती महिलाएं थीं। जुलाई 2014 तक करीब 600 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 60 गर्भवती महिलाएं है।
ग्रामीण इलाकों में महिलाएं ज्यादा पीड़ित
एनीमिया के ज्यादा मामले ग्रामीण इलाकों में सामने आ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं पुरुष के बराबर घर का काम करती हैं, लेकिन अपने खाने पर पुरुष की तुलना ध्यान नहीं देतीं। गर्भवती महिलाओं में यह खतरा ज्यादा रहता है। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण महिलाओं को जरूरत के अनुसार डाइट नहीं मिल पाती है।
स्कूल तक छोड़ देते है बच्चे
एनीमिया का शिकार होने पर बच्चे पढ़ाई में अपना मन नहीं लगा पाते हैं। उनकी स्मरण शक्ति तथा आंखों की रोशनी भी कमजोर होने लगती है। ऐसी स्थिति में अक्सर बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं, जिससे उनका भविष्य खराब हो जाता है।
एनीमिया के लक्षण
स्मरण शक्ति का कमजोर होना, नाखूनों का रंग सफेद हो जाना, थोड़ा सा काम करने पर सांस का जल्दी फूल जाना, स्वाभाव में चिड़चिड़ापन आ जाना, शरीर में हर समय थकान रहना, किसी भी काम में मन नहीं लगना व चेहरे पर फीकापन आ जाना।
- स्वास्थ्य विभाग एनीमिया की रोकथाम के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। स्कूलों में स्वास्थ्य शिविरों को आयोजन कर बच्चों की जांच की जा रही है।
डॉ. अरुण शर्मा, सीएमओ