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सैकड़ों वीरों की गाथा समेटे हुए है गुरुनगरी अमृतसर

Tue, 09 Sep 2014 05:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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अगर आपका वीकेंड तीन से चार दिन लंबा है और आप कई दिनों से कहीं गए नहीं हैं तो ऐसे में अमृतसर आपके लिए मुफीद जगह हो सकती है।
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दिल्ली से 464 किमी दूर अमृतसर पंजाब में बसा वो शहर है जो न सिर्फ अपने धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है बल्कि इसका भारत के इतिहास में भी अपना विशेष स्थान है। अमृतसर की स्थापना सिखों के चौथे गुरू, गुरू रामदास ने 1574 में की थी। 1574 में इसे गुरू रामदास ने इसे अपना घर बना लिया और यहीं रहने लगे।

उस समय अमृतसर को गुरू दा चक्क के नाम जाना जाता था जिसे बाद में लोग चक्क रामदास कहने लगे।
अमृतसर का जितना महत्व सिखों के लिए है उतना ही स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से ये जुड़ा है और फिर विभाजन के बाद इसका महत्व और बढ़ गया है।

यहां घूमने के लिए कई जगह हैं जिनमें से एक जगह को भी आप मिस करना नहीं चाहेंगे। इन सबको घूमने के लिए आपको कम से कम दो दिन तीन दिन तो लेकर आना ही पड़ेगा। तो आइए हम आपको अमृतसर की सैर पर ले चलते हैं और उम्मीद करते हैं कि ये पढ़ने के बाद आप अमृतसर जरूर घूम कर आएंगे।
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स्वर्ण मंदिर
धार्मिक महत्व वाला स्वर्ण मंदिर सिखों का प्रमुख तीर्थस्थल है। मंदिर का नाम इसके स्वर्ण से बने गुंबद के कारण पड़ा है। सिखों के चौथे गुरू रामदास ने शुरूआत में यहां तालाब बनवाया था जिसके बीच में अब मंदिर स्थित है। सिखों की धार्मिक ग्रंथ गुरू ग्रंथ साहिब यहां दिन में रखा जाता है और रात में उसे अकाल तख्त में रख दिया जाता है। आप अमृतसर आएं और स्वर्ण मंदिर ना आएं तो आपकी यात्रा अधूरी मानी जाती है। ये सिखों के लिए काशी जितना पावन है।

वाघा बॉर्डर
वाघा दुनिया की एकमात्र सड़क है जो भारत और पाकिस्तान के बीच में से क्रॉस करती हुई जाती है। ये सड़क अमृतसर से लाहोर तक जाती है। वाघा बॉर्डर अमृतसर से 28 किमी दूर स्थित है। यहां हर शाम दोनों देशों की ओर से होने वाली बीटिंग रीट्रीट चेंज ऑफ गार्ड्स को देखने के लिए हजारों की संख्या में सैलानी आते हैं। दोनों देशों की ओर से सैनिकों का दिखाया जाने वाला जोश और जज्बा लोगों को देशभक्ति की भावना से भर देता है। अमृतसर आएं तो यहां आना बिल्कुल ना भूलें क्योंकि यहां की शाम आप जीवन भर नहीं भूल पाएंगे।

जलियांवाला बाग
यहां का तो नाम लेने की जरूरत ही नहीं है क्योंकि हम सब ने कभी न कभी अपनी पढ़ाई के दौरान यहां के बारे में पढ़ा है या बॉलीवुड की कई फिल्मों में देखा है। ये वही बाग है जहां जनरल डायर ने 13 अप्रैल 1919 को हजारों निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवा दी थीं। ये बाग भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक अहम हिस्सा है जिसने भगत सिंह जैसे सपूत में देशप्रेम का जज्बा जगाया। जलियांवाला बाग चारों तीन तरफ से दीवारों से घिरा बाग है जिसमें एक कुंआ भी है। अमृतसर आना हो तो शहीदों की भूमि को जरूर नमन करें।

अकाल तख्त
स्वर्ण मंदिर से बहुत करीब स्थित है अकाल तख्त। इसका मतलब है सिखों की सबसे ऊंची गद्दी, इसे गुरू हरगोविंद ने सन 1609 में बनवाया था। इसे भगवान का घर भी कहा जाता है और अकाल बंग के नाम से भी जाना जाता है।

दुर्गियाना मंदिर
ये दुर्गा माता का मंदिर जिसका डिजाइन स्वर्ण मंदिर जैसा है और ये अमृतसर के लौहगढ़ गेट के बाहर स्थित है। ये अमृतसर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से पैदल दूरी पर है।

राम बाग
महाराजा रणजीत सिंह के काल में राम बाग गर्मियों में उनका महल हुआ करता था। इस महल की खासियत है कि इसकी इंटरनल कूलिंग सिस्टम जो इसके बनावट के कारण है। इसे देखने के लिए हजारों लोग हर साल यहां आते हैं। यहां महाराजा रणजीत सिंह की घोड़े पर सवार एक सजीव लगने वाली मूर्ति भी है। इसका नाम गुरू रामदास के नाम पर पड़ा है।

इनके अलावा यहां माता मंदिर, तरण तारण साहिब, फरीदकोट किला, गोविंद गढ़ किला, पुल कंजरी, जामा मस्जिद खैरुद्दीन, गुरू अंगद देव जी की समाधि आदि कई ऐसे स्थान हैं जहां घूमकर आपका टूर यादगार बन जाएगा।
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कैसे पहुंचे अमृतसर

वायु मार्ग- अमृतसर का राजा सांसी हवाई अड्डा दिल्ली से अच्छी तरह जुडा हुआ है।

रेल मार्ग- दिल्ली से टाटानगर-जम्मूतवी एक्सप्रैस और गोल्डन टेम्पल मेल द्वारा आसानी से अमृतसर रेलवे स्टेशन पहुंचा जा सकता है।

सडक मार्ग- अपनी कार से भी ग्रैंड ट्रंक रोड द्वारा आसानी से अमृतसर पहुंचा जा सकता है। बीच में विश्राम करने के लिए रास्ते में सागर रत्ना, लक्की ढाबा और हवेली अच्छे रस्तरां है। यहां पर रूककर कुछ देर आराम किया जा सकता है और खाने का आनंद भी लिया जा सकता है। इसके अलावा दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे से भी अमृतसर के लिए बसें जाती हैं।
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