इस मामले को लेकर भोले भंडारी चेरिटेबल ट्रस्ट ने जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संगठन का दावा है कि वह पिछले 28 वर्षों से तीर्थयात्रियों की सेवा कर रहा है। उन्हें इस बार भी अमरनाथ यात्रा में लंगर लगाने का मौका दिया जाए।
श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड से कई पुराने लंगर संगठनों को लंगर लगाने की अनुमति न मिलने पर उनमें नाराजगी है। इस मामले को लेकर भोले भंडारी चेरिटेबल ट्रस्ट ने जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संगठन का दावा है कि वह पिछले 28 वर्षों से तीर्थयात्रियों की सेवा कर रहा है। उन्हें इस बार भी अमरनाथ यात्रा में लंगर लगाने का मौका दिया जाए।
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पारंपरिक पहलगाम और बालटाल से यात्रा क्षेत्र (आधार शिविर से पवित्र गुफा तक) में देशभर से सौ से अधिक छोटे-बड़े लंगर संगठन सेवाएं देते हैं। इन लंगरों की अनुमति श्राइन बोर्ड देता है। जबकि, लखनपुर से कश्मीर तक अन्य यात्रा रूट पर संबंधित जिला प्रशासन लंगर लगाने की अनुमति देते हैं। तीन जुलाई से शुरू हो रही यात्रा के लिए 20 जून तक लंगर संगठन पहुंचना शुरू हो जाएंगे।
अमूमन श्राइन बोर्ड की ओर से पिछले साल के प्रदर्शन के आधार पर अगले साल संबंधित संगठन को लंगर की अनुमति दी जाती है। इसमें यात्रा से पहले संबंधित लंगर संगठन को पत्र या मेल के माध्यम से एक ऑफर लेटर भेजकर दोबारा लंगर लगाने के लिए उनकी इच्छा पूछी जाती है। इसके बाद इच्छुक लंगर संगठन से जरूरी दस्तावेज लेकर लंगर की अनुमति जारी की जाती है। लेकिन, इस बार करीब सात से आठ ऐसे लंगर संगठनों को ऑफर लेटर नहीं भेजा गया है।
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कमियां बताएं, हम दूर करेंगे : सावलो
श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर ऑर्गेनाइजेशन (सावलो) के प्रधान राजन गुप्ता ने बताया कि उनके भोले भंडारी चेरिटेबल ट्रस्ट को इस बार बोर्ड की ओर से लंगर के लिए ऑफर लेटर नहीं भेजा गया है। हमारा संगठन तीन दशकों से श्रद्धालुओं की सेवा कर रहा है। अगर कोई कमियां हैं, तो हमें बताया जाए, जिसे दूर करके लंगर सेवा जारी रखी जा सके।