श्री अमरनाथ यात्रा में शायद पहली बार ऐसा होगा, जब राज्य पुलिस के यात्रा में तैनात होने वाले अधिकांश जवानों के हाथों में हथियारों की जगह कुदरती आपदा से निपटने वाले यंत्र भी होंगे, क्योंकि राज्य पुलिस ने यात्रा की सुरक्षा में कुदरती आपदा को आतंकवाद से बड़ा खतरा माना है।
इसलिए दोनों मार्ग पर इससे निपटने के लिए अधिक इंतजाम किए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में आपदा से निपटने के लिए बनाई गई टीमों की संख्या तीन गुणा बढ़ा दी गई है। खासकर कश्मीर संभाग की पुलिस फोर्स को साफ तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी तरह की कुदरती आपदा से निपटने के लिए तैयार रहें।
दरअसल, सितंबर 2014 में कश्मीर में आई बाढ़ ने घाटी में आपदा प्रबंधन की पोल खोल कर रख दी। अभी भी क्षतिग्रस्त ढांचा दुरुस्त नहीं हुआ। जरा सी बरसात कश्मीर में बाढ़ के हालात पैदा कर देती है।
सुरक्षा को कहां कितनी टीमें
ऐसे में राज्य पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से आपदा प्रबंधन को अहम माना है। कश्मीर संभाग के आईजीपी पुलिस, जेएम जिलानी ने बताया कि आपदा प्रबंधन से निपटने में पुलिस ने अपने जवानों, ढांचे और यंत्र की संख्या में इजाफा किया है।
यात्रा में माउंटेन रेस्क्यू टीम, एवलांच रेस्क्यू टीम और डॉग स्क्वायड को तैनात कर दिया गया है। इनकी संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष तीन गुणा इजाफा किया है। 25 जून से इन टीमों ने मोर्चा संभाल लिया है।
छह माउंटेन रेस्क्यू टीमें (प्रत्येक में10 पुलिस कर्मी) पहलगाम रूट के शेषनाग, बववाल, पौषपतरी, लोअर होली केव में तैनात रहेंगी, जबकि बालटाल रूट से संगम और बरारीमार्ग पर भी टीमें तैनात होंगी।
पिछले वर्ष सिर्फ 12 लोगों का दल तैनात था। नौ टीमें एवलांच रेस्क्यू की होंगी। इन टीमों को कुदरती आपदा से निपटने के लिए यंत्र दिया गया है।
लखनपुर से लेकर गुफा तक अचूक सुरक्षा
दोनों मार्गों पर कुछ जगहों चुना गया है, यहां पर कुदरती आपदा की सबसे अधिक मार पड़ सकती है। इसके अलावा श्रीनगर शहर, आनंतनाग, कुलगाम, और झेलम नदी के आसपास के इलाकों में जवानों को बाढ़ से निपटने के लिए तैनात किया गया है। इन जवानों को बाढ़ से निपटने के लिए कहा गया है।
इसके अलावा आतंकवाद, अलगाववादियों और देश विरोधी तत्वों से निपटने के लिए भी कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। लखनपुर से गुफा तक हर एक किलोमीटर के दायरे में सीआरपीएफ, राज्य पुलिस, भारतीय सेना, सशस्त्र सीमा बल, बीएसएफ के जवान तैनात होंगे।