श्रद्धालुओं को मौसम संबंधी खतरों से आगाह करने के लिए पवित्र गुफा के अलावा पंजतरणी, चंदनबाड़ी, बालटाल सहित सात-आठ स्थानों पर मौसम संबंधी निगरानी केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। जम्मू, बनिहाल और श्रीनगर में अत्याधुनिक डॉप्लर रडार प्रणाली भी सक्रिय रहेगी।
जम्मू और श्रीनगर के डॉप्लर रडार को बिजली व बनिहाल को डीजी सेट पर चलाया जाएगा। इन रडार के माध्यम से हवाई क्षेत्र में सौ किलोमीटर तक के क्षेत्र को कवर किया जाएगा, जिससे श्राइन क्षेत्र के आसपास मौसम संबंधी उचित जानकारी मुहैया होगी। यात्री निवास भगवती नगर जम्मू से दो जुलाई को पहला जत्था कश्मीर के लिए रवाना होगा, जो अगले दिन तीन जुलाई को बालटाल से होते हुए बाबा बर्फानी के दरबार में पहुंचेगा, जबकि पहलगाम रूट से दो से तीन दिन बाद जत्था दरबार तक पहुंचेगा।
इससे पूर्व एक जुलाई को जत्थे की रवानगी से पहले मौसम संबंधी जानकारी मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर की ओर से जारी की जाएगी। इसके आधार पर ही जत्थे को आगे बढ़ाया जाएगा। अगर मौसम अधिक खराब होने की भविष्यवाणी हुई तो जत्थे को एहतियातन स्थगित किया जा सकता है। रडार के माध्यम से भारी बारिश, आंधी, बाढ़, बादल फटने जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां पहले ही जारी कर दी जाएंगी, ताकि मजबूत आपात प्रबंधन को मदद मिल सके।
यात्रियों को सभी ताजा जानकारियां मिलेंगी
मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के निदेशक डॉ. मुख्तियार अहमद ने बताया कि जून के अंत तक सारी मौसम संबंधी प्रणाली सक्रिय कर दी जाएगी। इसमें तीन से सात दिन तक मौसम संबंधी भविष्यवाणी की जाएगी। इसके अलावा थोड़े समय में दो से तीन घंटे भी पूर्वानुमान मौसम संबंधी जानकारी श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड से साझा की जाएगी। विभाग की ओर से जत्थे से जाने के पहले और अगले जत्थे के लिए मौसम की भविष्यवाणी की जाती है। बोर्ड की वेबसाइट पर सभी मौसम संबंधी ताजा जानकारियां उपलब्ध रहेंगी।
कई बार बिगड़ा मौसम, हो चुका है बड़ा नुकसान
- 2010 में गुफा के पास बादल फटा था, लेकिन तब कोई नुकसान नहीं हुआ था।
- वर्ष 2021 में 28 जुलाई को गुफा के पास बादल फटने से तीन लोग फंस गए, जिन्हें बचा लिया गया था।
- नौ जुलाई 2022 को गुफा के पास सैलाब की चपेट में आने से 16 यात्रियों की मौत हो गई थी। इसमें कई लोग घायल भी हुए थे।
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