बाबा अमरनाथ के भक्त जम्मू शहर के भगवती नगर के आधार शिविर में रुक सकते हैं। इस बार रात के समय प्रवेश करने का समय 10 बजे तक रखा गया है, ताकि देर से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भी किसी दिक्कत का सामना न करना पड़े। पिछले वर्ष 9 बजे तक ही प्रवेश मिलता था।
यह बदलाव यात्रियों की सहूलियत को देखते हुए किया गया है, ताकि उन्हें दरबदर न होना पड़े। अधिक से अधिक यात्रियों को अंदर जगह दी जा सके। रात के समय पहुंचने के बाद उन्हें होटलों और अन्य जगहों पर रुकना पड़ता था।
यातायात पुलिस के एसएसपी फैजल कुरैशी का कहना है कि इस बार भगवती नगर में प्रवेश का कट आफ टाइम 10 बजे किया गया है। इससे काफी हद तक राहत मिलेगी। इसके अलावा अमरनाथ यात्रियों को लखनपुर में ही दस्तावेज चेक करके एक स्टीकर लगाकर छोड़ा जाएगा, ताकि रास्ते में कहीं भी उनको बार-बार जांच के लिए नहीं रोका जाए। इसके अलावा यात्रा का जत्था सुबह 4 बजे और 5 बजे छोड़ा जाएगा।
अमरनाथा यात्रियों की सुरक्षा के लिए कड़ी निगरानी
कश्मीर जोन के आईजीपी वीके विर्दी ने रविवार को नवयुग सुरंग से चंदनबाड़ी तक का दौरा किया। उन्होंने अमरनाथ यात्रा मार्ग और विभिन्न शिविर स्थलों पर की जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने पुलिस और सीएपीएफ के अधिकारियों के साथ एक बैठक की भी अध्यक्षता की।
बैठक में किसी भी सुरक्षा उल्लंघन को रोकने के लिए कड़ी निगरानी और गश्त पर जोर दिया गया। आईजीपी कश्मीर ने विभिन्न शिविर स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की भी बारीकी से जांच की। उन्होंने तीर्थयात्रियों को एएनई द्वारा होने वाले नुकसान से बचाने के लिए उचित, मजबूत और निरंतर सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया। निरीक्षण में निगरानी प्रणालियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल के अलावा जमीनी तैनाती, पहुंच नियंत्रण, एएस जांच टीमों और उनके साजो-सामान का मूल्यांकन शामिल था।
चंदनबाड़ी में आईजीपी कश्मीर ने पुलिस और सीएपीएफ के अधिकारियों के साथ यात्रा के लिए किए गए सुरक्षा उपायों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने यात्रा की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य और रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए समन्वय तंत्र, खुफिया जानकारी साझा करने और आकस्मिक योजनाओं पर विचार-विमर्श किया।
इससे पहले आईजीपी कश्मीर को अधिकारियों ने आगामी अमरनाथ यात्रा के लिए प्रस्तावित सुरक्षा उपायों/व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। इसमें एक्सेस कंट्रोल, एएससी, शिविर सुरक्षा की व्यवस्था, आधुनिक/तकनीकी उपकरणों का उपयोग और आपदा प्रबंधन की तैयारियां आदि शामिल थीं। उन्होंने अधिकारियों को सीसीटीवी, ड्रोन सहित आधुनिक सुरक्षा उपकरणों/प्रौद्योगिकी का पर्याप्त उपयोग करने का भी निर्देश दिया ताकि सुरक्षा निगरानी ग्रिड को बढ़ाया जा सके और एएनई और आतंकवादियों के बुरे मंसूबों को विफल किया जा सके।