जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के बडशाह चौक इलाके में स्थित दशनामी अखाड़े से गत शनिवार की सुबह पवित्र छड़ी मुबारक को संरक्षक महंत दीपेंदर गिरी की अगुवाई में श्रीनगर से पहलगाम के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना किया गया था।
इस अवसर पर देश भर से आए साधु संत इस छड़ी के साथ पवित्र अमरनाथ जी की यात्रा के लिए रवाना हुए। महंत दीपेंदर गिरी ने कहा कि सुरेश्वर मंदिर श्रीनगर, पाम्पोर शिव मंदिर, बिजबिहाड़ा और फिर मार्तण्ड मंदिर में पूजन के बाद पहलगाम में लिद्दर नदी के पास गणेश जी के मंदिर में पूजन किया।
पहलगाम में दशमी और एकादशी की रात विश्राम किया। द्वादसी (28 अगस्त) को चंदनवाड़ी में रुके। 29 अगस्त को शेषनाग में, चतुर्दशी (30 अगस्त) पंचतरणी में रुके। 31 अगस्त को सूर्य उदय के साथ ही छड़ी मुबारक को पवित्र अमरनाथ गुफा में स्थापित कर वैदिक मंत्रों से पूजा की गई। 31 अगस्त को रात्रि पड़ाव पंचतरणी में होगा।
एक सितंबर को शेषनाग और चंदनबाड़ी होते हुए पहलगाम में रात्रि पड़ाव होगा। दो सितंबर में लिद्दर नदी के किनारे पूजन और विसर्जन के बाद महात्माओं के भोज के साथ इस वर्ष की पवित्र यात्रा पूर्ण होगी।