कागज मिले तो खुशी का ठिकाना न रहा
मैशन ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया और जब कागजात उसके पास पहुंच गए तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनके मन में जब यह विचार आया तो उन्होंने परिवार के सदस्यों से भी चर्चा की थी। सब इसे असंभव बता रहे थे, लेकिन जब कागजात मिले तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
वे कहते हैं कि फिलहाल चांद पर बसना तो संभव नहीं है। हो सकता है कि 40-50 साल बाद यह संभव हो पाए। लेकिन यह जरूर है कि इसके जरिये लोगों में जागरूकता बढ़ेगी। लोग चांद के विषय में अधिकाधिक जानकारी रखने के लिए प्रेरित हो सकेंगे।