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शीतकालीन राजधानी में सजाया जा रहा दरबार

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साल 1872 से महाराजा गुलाब सिंह के शासन काल से जम्मू-कश्मीर रियासत में चल रही दरबार मूव की प्रक्रिया के तहत ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर से शीतकालीन राजधानी जम्मू में दरबार मूव करने की कवायद शुरू हो चुकी है।
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142 साल पुरानी परंपरा के तहत जम्मू में सरकार के दरबार को सजाने का काम जोर-शोर से शुरू हो चुका है। सचिवालय हो या फिर दरबार मूव से जुड़े कार्यालय। मंत्रियों और अधिकारियों के क्वार्टरों की साफ-सफाई और रंगाई-पुताई का काम भी तेज हो चुका है।

आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अक्तूबर महीने के आखिरी सप्ताह में ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में दरबार बंद हो जाएगा और फिर दरबार मूव की जारी परंपरा के तहत जम्मू में नवंबर महीने के पहले सप्ताह में सरकार का दरबार सजेगा।
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रंग-रोगन का काम जोरों पर

दरबार मूव शिफ्ट करने के काम में गिने चुने दिनों को देखते हुए एस्टेट विभाग की ओर से नागरिक सचिवालय, विधानसभा कांप्लेक्स, एस्टेट कालोनियों व मंत्रियों और अधिकारियों के क्वार्टरों की साफ सफाई का काम तेज हो चुका है।

सचिवालय और विधानसभा इमारत में रंग-रोगन का काम जोरों पर चल रहा है। एस्टेट विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जम्मू विनोद वहनाल का कहना है कि दरबार मूव के प्रबंधों के तहत सचिवालय समेत अन्य कार्यालयों और एस्टेट कालोनियों में साफ सफाई और रंगाई-पुताई का काम तेजी से चल रहा है।
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दरबार मूव की परंपरा पर उठते रहे हैं सवाल

दरबार मूव की परंपरा के तहत करोड़ों रुपये की राशि हर छह साल बाद कवायद के तहत खर्च होने पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी इस कवायद को पैसे की बर्बादी की कवायद कह चुके हैं। राजनीतिक दल भी इस परंपरा में बदलाव की समय-समय पर बातें कर चुके हैं। इसके बावजूद यह परंपरा लगातार जारी है।

सात हजार मुलाजिमों के लिए 3167 क्वार्टर
दरबार मूव के लिए एस्टेट विभाग के पास जम्मू में 3167 के करीब क्वार्टर हैं। दरबार के साथ करीब सात हजार मुलाजिम श्रीनगर से जम्मू आएंगे और अगले छह महीने तक दरबार जम्मू में ही रहेगा। जिन मुलाजिमों के लिए क्वार्टरों की कमी होगी। उनके लिए होटल आदि में कमरे बुक किए जाएंगे।

दरबार मूव के साथ ही जम्मू में सुरक्षा पुख्ता होने के साथ-साथ यातायात का लोड भी बढ़ जाएगा। कश्मीर में विनाशकारी बाढ़ के बाद जम्मू में नवंबर माह में खुलने वाले दरबार के लिए यहां जम्मू के मुलाजिमों में खासा उत्साह है।
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