अनुच्छेद-370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर और दिल्ली के बीच जमी बर्फ पिघलने से आगे की बातचीत के द्वार खोल दिए हैं। विशेष दर्जा खत्म करने के बाद कश्मीरी नेताओं के साथ इस पहली बैठक में केंद्र ने घाटी की दिल्ली व दिल की दूरी पाटने की कोशिश की है। दिल्ली दरबार की ओर से जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के बाद जल्द विधानसभा चुनाव करवाने के भरोसे के बीच गुपकार गठबंधन भी परिसीमन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार हो गया है।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महीनों नजरबंद रहे नेताओं के गिले-शिकवे सुन उन्हें मरहम भी लगाने की कोशिश की। कश्मीरियत और जम्हूरियत की मजबूती पर जोर देते हुए दिल्ली ने पाकिस्तान समेत दुनिया को एक संदेश भी दिया है। बैठक के बाद तमाम नेताओं ने एक सुर में कहा कि बातचीत अच्छे माहौल में हुई।
बैठक में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के नेताओं के सामने प्रदेश के विकास का ब्लू प्रिंट सामने रखा। तमाम नेताओं की बात सुनने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा, जम्मू-कश्मीर उनके दिल में बसता है। प्रदेश के विकास के लिए वह हर संभव कोशिश करेंगे। जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
महबूबा के बयान से किनारा कर फारूक ने दिया संदेश
पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान से बातचीत करने के महबूबा के बयान से किनारा कर कई संदेश दिए हैं। वीरवार को दिल्ली पहुंचते ही सर्वदलीय बैठक से पहले फारूक ने कहा कि पीडीपी प्रमुख महबूबा का अपना एजेंडा है और उनका अपना। मुझे पाकिस्तान से नहीं अपने वतन से बात करनी है। अपने प्रधानमंत्री से बात करनी है।
प्रधानमंत्री मोदी की सर्वदलीय बैठक बुलाने की पहल स्वागत योग्य कदम है। फारूक के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। इसे पाकिस्तान को संदेश, दिल्ली दरबार से नजदीकी बढ़ाने और गुपकार गठबंधन के भविष्य से भी जोड़कर देखा जा रहा है।