जम्मू में डॉ. फारूक अब्दुल्ला के बठिंडी स्थित निवास पर दोपहर दो बजे होने वाली इस मिटिंग की कई दिनों से तैयारी चल रही थी। आयोजन में मिशन स्टेटहुड के अध्यक्ष के अलावा शिव सेना बाल ठाकरे, सीपीआई, कांग्रेस, जनता दल, अवामी नेशनल कांफ्रेंस, अकाली दल को भी बुलाया गया है।
भाजपा के खिलाफ जम्मू में लामबंदी बढ़ाने के लिए नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला की शनिवार दस सितंबर को जम्मू में सर्वदलीय बैठक में गुपकार गठबंधन में शामिल पांच दलों के अलावा चार और संगठनों को न्योता दिया गया है।
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बाहरी प्रदेशों के लोगों को जम्मू कश्मीर में मताधिकार के अलावा जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जे की बहाली समेत सियासी परिदृश्य पर चर्चा विषय पर बुलाई गई बैठक में पहली बार मिशन स्टेटहुड के अध्यक्ष सुनील डिंपल को भी बैठक में हिस्सा लेने का न्यौता दिया गया है।
इसके अलावा कांग्रेस के अध्यक्ष विकार रसूल और शिव सेना ठाकरे के अध्यक्ष मुनीश साहनी को भी बुलाया गया है। सूत्रों के अनुसार अकाली दल और जनता दल यूनाइटेड को भी न्यौता दिया गया है। पीडीपी, अवामी नेशनल कांफ्रेंस, सीपीआई पहले से ही गुपकार गठबंधन के घटक के तौर पर बैठकों में हिस्सा लेते रहे हैं।
ऐसे में शनिवार को भी इन दलों के प्रतिनिधि सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लेंगे। मिशन स्टेटहुड के अध्यक्ष सुनील डिंपल का कहना है कि जम्मू कश्मीर को राज्य के दर्जें की बहाली और जम्मू कश्मीर व लद़्दाख को फिर से एकजुट करना उनका मुख्य एजेंडा हैं और इसके लिए वह सर्वदलीय बैठक में आवाज उठाएंगे।
वहीं शिवसेना ठाकरे के प्रदेश अध्यश मुुनीश साहनी का कहना है कि जम्मू कश्मीर में उत्तर पूर्व के राज्यों की तरह अनुच्छेद 371 लागू होना चाहिए। यहां के लोगों के रोजगार और भूमि पर बाहरी लोगों को हक न मिले। इसके लिए शिव सेना बाल ठाकरे सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लेगी।
आजाद की पार्टी नहीं बनी, इसलिए बैठक में नहीं बुलाया
जम्मू। नेकां अध्यक्ष व सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला शुक्रवार की दोपहर जम्मू पहुंचे। वह शनिवार को अपने भठिंडी स्थित आवास पर सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। डॉ. फारूक ने जम्मू पहुंचकर कुछ पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा की। वहीं, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद को सर्वदलीय बैठक में न्योता नहीं दिए जाने पर नेकां के एक पदाधिकारी का कहना है कि आजाद की अभी कोई पार्टी नहीं बनी है, जिससे उन्हें सर्वदलीय बैठक के लिए नहीं बुलाया जाए। ये बैठक विभिन्न दलों की बुलाई गई है। ब्यूरो