वे लोग पूरी तरह से आर्मी की वर्दी में थे। कंधों पर बैग टंगे हुए थे। पूरे शरीर पर सामान बांध रखा था। पहले तो लगा कि आर्मी वाले हैं। लेकिन उनके जूते काले रंग के नहीं थे। जूतों का रंग बुरा था। जूते वैसे भी नहीं लग रहे थे। जैसे आर्मी वाले पहनते हैं। बस यहीं से लग गया कि ये लोग आर्मी वाले नहीं। बल्कि आतंकी हैं। इसके बाद हमने इसकी जानकारी अपने घर में दी। घर वालों ने पास में मौजूद सेना को दी।
20 से 22 बच्चे पढ़ने जाते हैं ट्यूशन
इन बच्चों को शिक्षक मनोज कुमार मंदिर परिसर में ट्यूशन पढ़ाते हैं। 20 से 22 बच्चे आते हैं। शिक्षक का भी कहना है कि वह जब मंदिर परिसर की तरफ जा रहे थे। बाहर से देख लिया था कि कुछ लोग अंदर सेना की वर्दी में हैं। उनका हाव-भाव देखकर समझ आ गया कि वे आतंकी हो सकते हें। यह देखकर वापस आ गया।