उद्घाटन के बाद पत्रकारों से बातचीत में जितेंद्र सिंह ने इसे एम्स जम्मू की प्रगति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि पिछले आठ से दस वर्षों में संस्थान ने बुनियादी ढांचे, फैकल्टी और चिकित्सा सुविधाओं के क्षेत्र में तेजी से विकास किया है। यहां कई नई विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं भी शुरू की गई हैं।
हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ विशेषज्ञ विभागों में शिक्षकों (फैकल्टी) की कमी के कारण रेजिडेंट सीटों और नए पाठ्यक्रमों के विस्तार में परेशानी आ रही है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर एम्स जम्मू के निदेशक संजीव सिन्हा के साथ चर्चा की गई है और दिल्ली में भी इसे उठाया जा रहा है। संस्थान में एमडी और डीएम जैसे उच्च चिकित्सा पाठ्यक्रम पहले ही शुरू किए जा चुके हैं।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर देश का संभवत: एकमात्र केंद्र शासित प्रदेश है, जहां दो एम्सहैं। इनमें एक जम्मू संभाग के सांबा जिले के विजयपुर में और दूसरा कश्मीर के अवंतिपोरा में स्थित है। उन्होंने जम्मू में दूसरे एम्स की स्थापना का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत हस्तक्षेप को दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री चाहते थे कि यदि श्रीनगर में एक एम्स स्वीकृत किया गया है तो जम्मू में भी दूसरा संस्थान स्थापित होना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने उम्मीद जताई कि एम्स जम्मू आने वाले समय में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा केंद्र बनेगा। यहां एलोपैथिक चिकित्सा के साथ आयुष सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि यह संस्थान न केवल जम्मू संभाग बल्कि हिमाचल प्रदेश और पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों के मरीजों के लिए भी प्रमुख रेफरल अस्पताल के रूप में काम करेगा।