लंबी जद्दोजहद और पांच राउंड की वार्ता के बाद आखिरकार 72 घंटे का जम्मू बंद फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। उपमुख्यमंत्री और भाजपा मंत्रियों व विधायकों की टीम के साथ एम्स कोआर्डिनेशन कमेटी की चार घंटे तक पीडब्ल्यूडी गेस्टहाउस में वार्ता चली। पांच राउंड की वार्ता के बाद उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह ने एम्स कोआर्डिनेशन कमेटी को आश्वासन दिया कि 20 जुलाई तक जम्मू में एम्स निर्माण का ऐलान कर दिया जाएगा।
वार्ता के बाद उपमुख्यमंत्री और अन्य मंत्री तवी पुल स्थित महाराजा हरि सिंह की प्रतिमा के पास पहुंचे और वहां भूख हड़ताल पर बैठे अनशनकारियों को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। उल्लेखनीय है कि भूख हड़ताल का वीरवार को सातवां दिन था। एम्स कोआर्डिनेशन कमेटी ने 19 से 21 जून तक जम्मू बंद का ऐलान किया था।
वार्ता के बाद उपमुख्यमंत्री डा. सिंह ने कहा कि कमेटी के प्रतिनिधियों की बात सुनी है। वह पहले ही जम्मू में एम्स का प्रयास कर रहे हैं। 20 जुलाई तक इस संबंध में केंद्र सरकार से घोषणा करवाएंगे। उनके साथ उपस्थित एम्स कोआर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन अभिनव शर्मा ने कहा कि उपमुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों ने उन्हें लिखित आश्वासन दिया है कि 20 जुलाई से पहले केंद्र सरकार से एम्स निर्माण का आदेश उपलब्ध करवाएंगे।
फिलहाल उन्होंने जम्मू बंद स्थगित कर दिया है। साथ ही भूख हड़ताल पर विराम लगाया जाएगा। यदि 20 जुलाई तक ंएम्स पर घोषणा नहीं होती तो कमेटी अपने स्तर पर अगला फैसला लेगी। सरकार से आमंत्रण पाकर सुबह लगभग 12.30 बजे एम्स कमेटी के प्रतिनिधि गेस्ट हाउस पहुंचे। जहां लंबी वार्ता के दौरान कई बार बैठक में ब्रेक लगा। दोनों पक्ष अपने स्तर पर विचार विमर्श करते रहे। एक समय ऐसा लग रहा था कि वार्ता विफल हो जाएगी।
कमेटी के कुछ प्रतिनिधि सरकार के रवैये से संतुष्ट नजर नहीं आए। लेकिन बाद में जम्मू बंद स्थगित कर दिया गया। वार्ता में उपमुख्यमंत्री के अलावा मंत्री बाली भगत, विधायक राजेश गुप्ता, सत शर्मा, रविंद्र रैणा, डिवकाम डा. पवन कोतवाल, डीसी सिमरनदीप सिंह, आईजी दानेश राणा, बार के पूर्व प्रेसीडेंट बीएस सलाथिया, चैंबर प्रेसीडेंट राकेश गुप्ता, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट शाम लंगर, वाइस प्रेसीडेंट दीपक अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
भाजपा ने कर रखी थी बंद विफल करने की योजना
गठबंधन सरकार के उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों ने भले ही एम्स कोआर्डिनेशन कमेटी को 72 घंटे के जम्मू बंद को अंतत: स्थगित करने में कामयाबी हासिल कर ली, लेकिन यदि वे कमेटी के प्रतिनिधियों को राजी करने में असफल होते तो उन परिस्थितियों में भी उन्होेंने बंद विफल करने की वैकल्पिक व्यवस्था कर रखी थी। इसका खुलासा तब हुआ, जब एम्स कोआर्डिनेशन कमेटी के साथ उनकी वार्ता लंबी खिंच गई और इस दौरान कई व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में मीटिंग में भाग लेने के लिए पहुंच गए।
आनन-फानन में उन्हें गेस्ट हाउस के अन्य कमरे में बैठाया गया। कोआर्डिनेशन कमेटी को दोपहर साढ़े बारह बजे बुलाया गया था। उपमुख्यमंत्री लगभग एक बजे गेस्ट हाउस पहुंचे। ऊपर के हाल में वार्ता शुरू हुई। उम्मीद थी कि आधे घंटे में फैसला हो जाएगा, लेकिन वार्ताओं के दौर प्रति दौर के बाद बातचीत पांचवें दौर में पहुंच गई। लगभग साढ़े तीन बजे एकाएक कुछ बाजार एसोसिएशन और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधि वहां पहुंचे। वह ऊपर चल रही मीटिंग में जाने का प्रयास करने लगे।
उन्हें पुलिसकर्मियों ने रोक दिया। उन्होंने बताया कि भाजपा की ओर से उन्हें बैठक के लिए बुलाया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि उन्हें जम्मू बंद में भाग न लेने के लिए बुलाया गया है। शाम चार बजे तक ऊहापोह की स्थिति बरकरार रही। बाद में ज्योंही दोनोें पक्षों में सहमति बनी, तो मीडिया के समक्ष उपमुख्यमंत्री ने फैसला सुनाया और वहां से निकल गए, जबकि बाजार और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को बिना बैठक के वापस लौटना पड़ा।
.., नाराज सलाथिया ने वार्ता छोड़ी
लगभग चार घंटे तक सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन न मिलने पर बार एसोसिएशन के पूर्व प्रेसीडेंट व एम्स कोआर्डिनेशन कमेटी के सदस्य बीएस सलाथिया वार्ता छोड़कर बाहर निकल आए। सलाथिया ने कहा कि वार्ता में डिप्टी सीएम ने स्वीकार किया है कि गठबंधन एजेंडे के कारण एम्स कश्मीर शिफ्ट किया गया।
डिप्टी सीएम जम्मू में एम्स स्थापना का आश्वासन तो दे रहे हैं, लेकिन वह अथारिटी नहीं हैं। उनके पास एम्स बनवाने की कोई पावर नहीं है। यह सिर्फ कमेटी के प्रतिनिधियों को जम्मू बंद से रोकने का प्रयास किया जा रहा है। वह वार्ता से संतुष्ट नहीं हैं, इसलिए बैठक छोड़कर बाहर आ गए हैं।
कमेटी के साथ धोखा किया: राणा
नेशनल कांफ्रेंस के संभागीय अध्यक्ष देवेंद्र राणा ने आरोप लगाया है कि डिप्टी सीएम और मंत्रियों ने एम्स कोआर्डिनेशन कमेटी के साथ धोखा किया है। सूचना विभाग से इस समझौते के संबंध में जारी प्रेस नोट में कहीं इस बात का जिक्र नहीं किया गया कि सरकार इस मुद्दे को केंद्र के पास रखेगी और 20 जुलाई तक इस पर फैसला करवाएगी। सरकारी प्रेस नोट में वादे की बजाय लिखा गया कि यह मामला पहले ही केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है।
नए सिरे पर इसमें कुछ नहीं किया जा रहा। वार्ता के दौरान कोआर्डिनेशन कमेटी के कुछ सदस्य भाजपा मंत्रियों और विधायकों के समूह के कोरे आश्वासन से सहमत नहीं थे और वह वार्ता के बीच में ही उठकर निकल गए। इससे साबित होता है कि इस मामले पर सरकार की ओर से कोई आश्वासन ही नहीं आया।