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धान की खरीदारी के लिए 14 को खुलेगी मंडियां

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आरएस पुरा। उपजिले में किसानों की धान बेचने की सुविधा के लिए कृषि विभाग और भारतीय खाद्य निगम की ओर से 14 अक्तूबर को गांव बैनागढ़ व त्रेवा में मंडियां खोली जाएंगी। स्थानीय किसानों ने मांग करते हुए कहा कि आरएस पुरा में मंडी खुलनी चाहिए।
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सीमावर्ती गांव अब्दुलियां के किसान दर्शन लाल का कहना है कि लगभग 25 किलोमीटर दूरी पर मंडी स्थापित करने पर गांव बैनागढ में जाना पड़ेगा। जिन किसानों के पास ट्रैक्टर नहीं हैं उनको अधिक किराया खर्च करना पड़ेगा। किसानों की आय दोगुनी किए जाने की योजना बनाई गई है, पर हालत यह हैं कि किसानों को धान बेचने के लिए 25 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी।
गांव चकरोई के किसान पूर्ण चंद ने कहा कि किसानों को पहले ही नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब धान की खरीदारी के लिए खोली की मंडी मीरां साहिब ब्लॉक के गांव बैनागढ़ में जाना पड़ेगा। सरकारी खरीद शरबती बासमती का भाव 2040 व 2060 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। धान खरीद मंडियों में जाने के बजाय किसान गांव में ही व्यापारियों को धान बेचना बेहतर समझते हैं। उन्हें सरकारी कीमत से अधिक कीमत मिलती हैं।
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किसान यशपाल चौधरी का कहना है कि कृषि विभाग और भारतीय खाद्य निगम द्वारा मंडी खोलना मात्र खानापूर्ति कर रहा है। किसानों को 20 किलोमीटर की दूरी पर धान बेचने से क्या लाभ होगा। आरएस पुरा कस्बा सुचेतगढ़ सहित आरएस पुरा के किसानों के लिए सेंटर प्लेस होने पर धान लाकर बेच सकते थे। आरएस पुरा से 15 किलोमीटर दूरी पर धान की खरीदारी के लिए मंडी खोलने का फैसला ठीक नहीं किया गया।
किसान सुभाष दषगोत्रा का कहना है कि जो लाभ किसानों को मिलना चाहिए वह गैर सरकारी संस्थानों व मिलरों को मिलता है। गत वर्ष चार हजार रुपये प्रति क्विंटल बासमती धान की कीमत तय की गई। अब आने वाले दिनों में क्या भाव तय होगा, इसकी कोई जानकारी नहीं। सरकार की ओर से बासमती की धान नहीं खरीदी जाती।
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बैनागढ क्षेत्र सेंटर प्लेस होने पर मंडी खोलने का फैसला किया है। इसी प्रकार अरनिया तहसील के त्रेवा क्षेत्र में भी मंडी खोली जाएगी, ताकि बिश्नाह के किसान भी वहां अपने धान की फसल बेच सकें। आरएस पुरा के अधिकतर किसान लगभग 70 फीसदी शुद्ध बासमती की धान लगाते हैं। गैर सरकारी संस्थानों व व्यापारियों की ओर से धान खरीदी जाती है।
-अश्विनी शर्मा, एसडीएओ, कृषि विभाग
फोटो
पकने की कगार पर खड़ी धान की फसल गिरी
किसान वर्ग ने जताई चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
परगवाल। सीमा क्षेत्र परगवाल में मंगलवार शाम को हुई बारिश के साथ चली हवाओं से कुछ किसानों की खेतों में खड़ी धान की फसल गिर गई, हालांकि बारिश इतनी ज्यादा तो नहीं हुई, लेकिन उसके बावजूद पकने के मुहाने पर खड़ी फसल को नुकसान होने की आशंका है।
स्थानीय किसान गिरधारी शर्मा ने कहा कि जब जब किसानों को उनकी मेहनत का फल मिलने को होता है, तब तब कुदरत कुछ ऐसा घटित करती है कि उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। पकने के मुहाने पर खडी़ फसल गिरना किसान वर्ग के लिए चिंता का विषय है। किसान रवि कुमार ने कहा कि बारिश के साथ चली हवा से ज्यादा नुकसान बासमती फसल को हुआ है। हालांकि जल्दी पकने वाली दूसरी किस्म की धान की फसल भी बारिश की चपेट में आई है। उनका कहना था की गिरी फसल को कटाई में भी बड़ी परेशानी आती है। उन्होंने भी मौजूदा सीजन में किसानों को नुकसान होने की बात कही।
तेज हवा और बारिश से धान की फसल को नुकसान
बिश्नाह। क्षेत्र में मंगलवार शाम को चली तेज हवा के बाद बारिश से धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं अन्य धान की फसलें भी जो शरबती 1617 वेरायटी 1509 वेरायटी को नुकसान हो गया है। क्षेत्र के गांव मक्खनपुर में आलू, फूलगोभी या कड़म की खेती को भी नुकसान पहुंचा है। संवाद
तेज हवा के साथ बारिश से किसानों की चिंताएं बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
आरएस पुरा। मौसम के अचानक करवट बदलने और घने बादल छाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मंगलवार को कुछ देर बाद तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। तेज हवाएं चलने पर किसानों के माथे पर चिंता बढ़ गई। अगर रात भर इसी प्रकार की बारिश होती रही व तेज हवा चली तो बारिश हुई, जिससे धान की फसलें ढहने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसान मक्खन चौधरी का कहना है कि बारिश से फसल तो भीगी तो खेतों में पानी भरने किसानों को फसलों के नष्ट होने की चिंता सताने लगी है। किसान मनदेव सिंह का कहना है कि तेज हवा के साथ अधिक बारिश से किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की फसल पक कर तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि मौसम दो-तीन दिन ऐसे ही रहा तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कृषि विभाग के अधिकारी गुलशन शर्मा का कहना है कि आरएस पुरा उपजिले में इस समय करीब 70 प्रतिशत बासमती की धान की फसल खेतों में खड़ी है। अधिक बारिश व तेज हवा चलने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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