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Jammu News: मशरूम की खेती से मालामाल हो रहे सांबा के किसान

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- सात हजार क्विंटल सालाना हो रहा मशरूम का उत्पादन
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- एयरकंडीशंड शेड में हर मौसम में हो रही पैदावार
प्रीतपाल चौधरी
सांबा। मशरूम सांबा के किसानों के लिए समृद्धि के द्वार खोल रहा है। जिले के राजपुरा और सुंब क्षेत्र मशरूम उत्पादन के हब के रूप में पहचान बना चुके हैं। शुरुआती दौर में कुछ हजार रुपये तक ही इसका कारोबार सिमट जाता था, लेकिन अब सालाना नौ करोड़ रुपये पहुंच गया है। परंपरागत खेती की तुलना में इसमें जोखिम कम और कमाई अच्छी है।
सांबा में मशरूम का उत्पादन तो दो दशक पहले शुरू हुआ था। किसान करन सिंह ने इसका मौसमी उत्पादन शुरू किया था। हालांकि वह बदले दौर में टिक नहीं सके, लेकिन उन्होंने उम्मीद जरूर रोप दी। उस उम्मीद का ही असर है कि इस समय 550 किसान इसके उत्पादन से जुड़ गए हैं। उनका सालाना उत्पादन 7000 क्विंटल है। स्थानीय बाजारों से लेकर पंजाब तक सालाना नौ करोड़ रुपये की मशरूम सिर्फ सांबा के किसान बेच रहे हैं। यही नहीं, कंपोस्ट व मार्केटिंग में भी रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
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सरकार भी दे रही प्रोत्साहन
मशरूम उत्पादकों के लिए सरकारी मशीनरी भी काफी मददगार साबित हो रही है। बारहों मास उत्पादन और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वातानुकूलित शेड (एसी शेड) बनवाने के लिए सरकार की ओर से आठ लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। किसानों को इस कारोबार से जुड़ने के लिए जागरूकता शिविर भी लगाए जा रहे हैं।

सक्सेस स्टोरी : रोजाना 50 किलो तक तैयार हो
जाता है मशरूम, बेचने में कोई दिक्कत नहीं
राजपुरा तहसील के चक लाला निवासी मुकेश कुमार 15 वर्षों से मशरूम के कारोबार से जुडे हुए हैं। वह बताते हैं, 12वीं पास करने के बाद मैंने नौकरी पाने के लिए कंप्यूटर सीखा। नौकरी नहीं मिली। पिता सीमित तौर पर मशरूम का उत्पादन करते थे। मैंने उनका हाथ बंटाना शुरू कर दिया। मैंने मशरूम उत्पादन का तरीका बदला। वातानुकूलित शेड तैयार कराया। प्रयोग सफल रहा। कृषि विभाग की योजना से 20 लाख रुपये का कर्ज लिया। इसमें आठ लाख रुपये की छूट मिल गई। तापमान चेक करने के लिए उपकरण लगाए। अब अच्छी कमाई के साथ कई लोगों को रोजगार भी मिला है। अब मेरे यहां हर रोज पचास किलो मशरूम तैयार हो जाता है। बेचने में कोई दिक्कत नहीं है।
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मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद मशरूम
उगाने में जुटे...40 युवकों को दिया रोजगार
करथोली निवासी पुष्पिंदर सिंह के पिता ने वर्ष 2000 में मशरूम का कारोबार शुरू किया था। पुष्पिंदर बताते हैं, पिता छोटे-छोटे रैक बना कर उसमें मशरूम लगाया करते। तब पैदावार कम होती थी और कमाई भी। मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद मैं भी इस काम में जुट गया। हमने एक वातानुकूलित शेड बनवाया। आज हमारे पास चार शेड हैं, जिसमें हर मौसम में मशरूम लगा रहे हैं। हमारे साथ 40 युवक जुडे हुए हैं। महीने में 25 से 30 क्विंटल मशरूम मंडी में जा रहा है। एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक महीने में कमाई हो जाती है। पुष्पिंदर को बीते साल अच्छे मशरूम उत्पादन के लिए उप राज्यपाल सम्मानित कर चुके हैं।
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अब खेती आसान
राजपुरा के युवा पंकज बताते हैं कि पहले मशरूम की खेती मुश्किल थी, लेकिन अब आसान हो गई है। इसके लिए आवश्यक पोषक तत्व कंपोस्ट खाद होती है। अब यह आसानी से मिल जाती है। यह आय का एक अच्छा साधन है।
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पढ़े-लिखे युवा आ रहे आगे
मशरूम की खेती के साथ युवाओं को जागरूक किया जा रहा है। पढ़े-लिखे युवक अब इस कारोबार को अपना रहे हैं। इससे उन्हें अच्छी कमाई हो रही है।
कुशल सिंह जंवाल, जिला अधिकारी मशरूम विभाग, सांबा

बढ़ रहा कारोबार
जिले में 550 किसान मशरूम के कारोबार के साथ जुडे हुए हैं। युवा वर्ग भी इस कारोबार को अपना रहा है। जिले में पिछले साल साढ़े नौ करोड़ का कारोबार हुआ था। साल-दर-साल यह कारोबार बढ़ रहा है।
-मदन गोपाल सिंह,मुख्य कृषि जिला अधिकारी सांबा
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