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नियंत्रण रेखा के किसानों को फसल बरबाद होने का डर

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नियंत्रण रेखा पर फसल की कटाई करता किसान।
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पुंछ। कोरोना के कारण दूसरे प्रदेश से मजदूर नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे में नियंत्रण रेखा के किसानों में गेहूं फसल के बरबाद होने का डर सता रहा है। उनमें आशंका है कि इस बीच अगर पाकिस्तान लगातार गोलाबारी करता रहा तो उनकी फसल यूं बरबाद हो जाएगी। हालांकि कुछ किसान स्वयं ही फसल की कटाई में लगे हैं।
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किसानों का कहना है कि अगर इसी प्रकार कोरोना का प्रकोप जारी रहता है और उन्हें कटाई के लिए मजदूर नहीं मिलते हैं तो न सिर्फ गेहूं की ही फसल बरबाद होगी बल्कि हम लोग मक्की की फसल भी नहीं उगा पाएंगे। क्योंकि जिस एक खेत की कटाई का काम वो मजदूर के सहयोग से कुछ घंटों में कर लेते थे अब वह परिवार सहित उस खेत की कटाई का काम तीन दिन में भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। उस पर गोलाबारी होने के बाद अगले दो तीन दिनों तक फिर गोलाबारी शुरू होने के डर से किसान खेतों का रुख भी नहीं करते हैं। जिले में नियंत्रण रेखा से सटे गांव जलास, सलोत्री, दिगवार, करमाड़ा आदि के किसान मोहम्मद याकूब, अब्दुल मजीद, सुलील कुमार, अशोक कुमार, संतोख सिंह, राज सिंह आदि का कहना है कि लॉकडाउन के कारण जहां बाहरी क्षेत्रों के अधिकतर मजदूर जोकि इस फसल कटाई के समय विशेष तोर पर जिले में आते थे वह नहीं आ पाए हैं उस पर जो थोड़े बहुत स्थानीय मजदूर मिल जाते थे वह भी अपने घरों में बंद हैं।
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