सांबा। जम्मू-कश्मीर में नई विधानसभा क्षेत्र को लेकर परिसीमन आयोग ने सांबा में एक नई सीट की सिफारिश की है। इसमें बडे़ अनोखे ढंग से क्षेत्रों को नई विधानसभा सीट रामगढ़ के साथ जोड़ा गया है। इसका अधिकतर क्षेत्र के लोगों ने विरोध किया है।
रामगढ़ विधानसभा सीट के लिए सीमावर्ती तहसील राजपुरा, हाईवे के किनारे बसी पटवार कटली, दियानी, रामनगर को रामगढ़ के साथ जोड़ा गया है। रास्ते में पड़ने वाले पंगदौर व बैनगलाड को सांबा के साथ रखा गया है। ऐसे में हर तरफ से आयोग के खिलाफ विरोध हो रहा है। विपक्ष के साथ भाजपा नेता भी विरोध में शामिल हैं। भाजपा के राजपुरा बीडीसी अध्यक्ष राधा कृष्ण ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को भी अपनी समस्या से अवगत करा दिया है कि वह रामगढ़ के साथ नहीं जुड़ना चाहते हैं।
चक दुलमा के सरपंच विनय शर्मा ने कहा कि भाजपा के इशारे पर ही राजपुरा को रामगढ़ के साथ जोड़ा जा रहा है। जो मंजूर नहीं है। दियानी पंचायत के सरपंच प्रदीप ललोत्रा का कहना है कि वह लोग सांबा से मात्र तीन व चार किलोमीटर की दूरी पर हैं। ऐसे में उन्हें रामगढ़ के साथ जोड़ना उनकी समझ से परे है। उन्होंने भाजपा पर कटाक्ष किया कि उनकी पंचायत के साथ अन्याय किया जा रहा है।
वही पंगदौर की पूर्व सरपंच रीना चौधरी का कहना है कि बार्डर विधानसभा सीट बनाई है, तो उनकी पंचायत को भी बार्डर सीट के साथ जोड़ा जाना चाहिए। जो नही किया गया है। वहीं बैनगलाड के लोगों का कहना है कि उन्हें भी बार्डर विधानसभा सीट के साथ जोड़ जाए, ताकि बार्डर विधानसभा सीट में मिलने वाली सुविधाएं उन्हें भी मिल सकें। रामगढ़ के लोगों ने भी अपना बिरोध जताया है कि रामगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता एवं पैंथर्स नेता यशपाल शर्मा ने कहा कि रामगढ़ को आरक्षित क्यों किया गया है। विजयपुर को आरक्षित किया जाता। उनका कहना था कि नई विधानसभा सीट रामगढ़ को न. 70 दिया जाना था। जिसमें 69 न. विजयपुर है, जिसे आरक्षित किया जाना था, लेकिन साजिश के तहत रामगढ़ को 69 न. दर्शा कर आरक्षित किया गया है, और विजयपुर को सामान्य वर्ग के लिए ही रखा गया है। इसको लेकर लोगों में काफी रोष है।
परिसीमन के बाद चुनाव की सरगर्मियां हुईं तेज
सांबा। प्रदेश में परिसीमन की प्रक्रिया के बाद अब चुनाव के लिए सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनितीक दलों के नेता लोगों में पहुंच रहे हैं।
सनद रहे कि गत दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि परिसीमन आयोग का काम पूरा होते ही प्रदेश में चुनाव कराए जाएंगे। इसको लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भागदौड़ कर रहे हैं। भाजपा नेता तो पहले से ही लोगों से संपर्क साधने में जुटे हैं। कांग्रेस नेता भी अंदर खाते लोगों के संपर्क में हैं। इस बार सांबा मेें सामान्य वर्ग के आरक्षित सीट होने पर स्थानीय उमीदवार को मौका दिए जाने की बातें कही जा रही हैं। इससे पहले भाजपा हाईकमान की ओर से बाहरी लोगों को टिकट देकर स्थानीय नेताओं को नजरअंदाज किया गया। अब लोगों का कहना है कि यदि भाजपा किसी स्थानीय नेता को ही टिकट देगी तो भाजपा की जीत आसान होगी। यही हाल कुछ कांग्रेस नेताओं का है। वह भी असमंजस की स्थिति में हैं। कांग्रेस नेता भी पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के रुख देख रहे हैं।
सांबा में कांग्रेस के दो गुट में बंटी होने पर स्थानीय नेता भी परेशान हैं। फिर भी वह आम लोगों के संपर्क में पहुंच रहे हैं। बैठकों का सिलसिला भी जारी है।
परिसीमन आयोग करता है भाजपा का प्रतिनिधित्व
सांबा। अपनी पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष स. मंजीत सिंह ने परिसीमन आयोग पर भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए समाज के वंचित वर्ग के प्रतिनिधित्व को कमतर करने का आरोप लगाया है। सांबा में एक सभा को संबोधित करते हुए मंजीत सिंह ने कहा कि जनता की इच्छा के विरुद्ध प्रस्तुत रिपोर्ट के प्रारूप से जनता निराश है। समाज के विभिन्न वर्गों की आपत्तियों के बाद भी जनता की लोकप्रिय मांगों पर विचार नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि परिसीमन आयोग की रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि वह चुनावों में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए चुनाव से पहले एक राजनीतिक दल का स्पष्ट रूप से समर्थन करना चाहते हैं। इसकी घोषणा की जानी बाकी है। उन्होंने कहा कि सुचेतगढ़ निर्वाचन क्षेत्र को भाजपा के भीतर से भी भारी दबाव के बाद बहाल किया गया था। चूंकि आयोग विभिन्न जिलों से आपत्तियों से अप्रभावित था, ऐसा प्रतीत होता है कि वे भाजपा का पक्ष लेना चाहते हैं। संवाद