मीरां साहिब। कई दिन से पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से आम जनता पर बोझ डाले जाने पर लोगों ने रोष जताते हुए केंद्र की सरकार की गलत नीतियों की कड़ी अलोचना की।
समाजसेवी सेवानिवृत्त हेड मास्टर प्रमोद कुमार का कहना है कि पहले से महंगाई की मार सह रहे लोगों पर केंद्र की सरकार की ओर से बोझ डाले जाने पर आने वाले दिनों में महंगाई में बढ़ोतरी होने पर गरीब व मध्यम वर्गीय लोगों की दिक्कतें में बढ़ोतरी होगी। प्रवीण कुमार का कहना है कि रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि की गई है। रसोई गैस के साथ पेट्रोल, डीजल के के दाम में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जिसकी वजह से गरीब मध्यम वर्गीय परिवेश का बजट असंतुलित हो गया है। उन्होंने कहा कि घरेलू गैस की कीमत के साथ पेट्रोल, डीजल के दाम में बेतहाशा वृद्धि की वजह से गरीब माध्यम वर्गीय परिवेश का बजट असंतुलित हो गया है। अगर केंद्र की सरकार की ओर से महंगाई पर नियंत्रण नहीं किया गया तो इससे आर्थिक तौर पर नुक्सान उठाना पड़ेगा।
मनदेव सिंह का कहना है कि पेट्रोलियम पर्दाथों में हर रोज बढ़ोतरी करने पर लोगों का बजट बिगड़ गया है। पेट्रोल शतक लगाने के उपरांत अब इससे भी आगे बढ़ रहा है। दूसरी और रसोई गैैस एक हजार रुपये के पार चला गया है। उन्होंने कहा कि इस समय बाजार में मंदी का दौर चल रहा। सब्जियों सहित अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी होने से गरीब व मध्यवर्गीय लोगों की कमर टूट चुकी है। सरकार को चाहिए कि महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए कड़े कदम उठाए। ताकि आम आदमी पर बोझ न बढ़े और लोग अपनी जरूरतों को पूरा कर सकें।
बंसी लाल का कहना है कि पांच सौ रुपये दिहाड़ी होने पर अब मजदूर को घर का खर्च चला पाना दिन ब दिन मुश्किल हो रहा है। केंद्र सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही, जिससे लोगों में नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ रोष व्याप्त है।