आरएस पुरा। सीमावर्ती गांव अब्दुल्लियां के किसानों ने बांध निर्माण के प्रयोग में खेतों से मिट्टी उठाकर प्रयोग में लाए जाने पर बिफर पड़े। उन्होंने रविवार को नारेाबजी करते हुए रोष जताया।
प्रदर्शन कर रहे किसान पंच सौदागर लाल, केवल कुमार ने बताया कि उनके खेत काफी ऊंचाई पर हैं। ऐसे में वह खेतों को समतल करने के लिए मिट्टी उठाई जा रही है और यह मिट्टी उन्होंने पहले ही ईंट भट्टा मालिकों को बेच रखी है। सीमा सुरक्षा बल द्वारा उनको ईंट भट्टा मालिकों को मिट्टी न देने के बजाय सीमा पर सुरक्षा बांध का काम कर रहे ठेकेदार को देने के लिए कहा जा रहा है। विरोध जता रहे किसानों ने बताया कि ठेकेदार उनको बहुत कम पैसे दे रहा है, जबकि ईंट भट्टा से उनको ज्यादा पैसा मिल रहा है। ऐसे में वो ठेकेदार को मिट्टी नहीं देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि वो ठेकेदार को मिट्टी देने पर उनको उचित रेट दिया जाए। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाते हुए हस्तक्षेप कर इंसाफ दिलाने की मांग की। इसके साथ ही विरोध जता रहे किसानों ने आरोप लगाया कि उनको प्रशासन द्वारा उनके खेतों से कच्ची गेहूं को खाली करने को कहा जा रहा है कि वो सरकारी जमीन है। किसानों ने कहा कि वह वर्षों से इस जमीन पर खेतीबाड़ी कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर जबरन उनसे कृषि योग्य जमीन छीनी गई तो वो सड़क पर उतर विरोध-प्रदर्शन करेंगे, जिसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।
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सुरक्षा बांध निर्माण में आई भूमि की राशि नहीं मिलने पर गुहार लगाई
आरएस पुरा। किसानों ने सुरक्षा बांध निर्माण में आई भूमि की राशि नहीं मिलने पर गुहार लगा समाधान करने की प्रशासन से मांग की। जव्वोवाल, दिवानगढ़, चकरोई आदि के किसान लवाराम, गुलजार सिह, गुरविंद्र सिंह, जोगिंद्र लाल, कर्मचंद आदि का कहना है कि वर्षों पहले सेना की ओर से सुरक्षा बांध का निर्माण किया गया। हर वर्ष एक कनाल भूमि का 55 हजार रुपये मुआवजा मिलता था। एक वर्ष बीत जाने पर राशि नहीं मिल पाई। किसानों का कहना है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों को अवगत कराए जाने पर पर राशि उपलब्ध नहीं होने के लिए कहा जाता है। किसानों का कहना है कि उनका दारोमदार कृषि योग्य भूमि पर खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन पोषण निर्भर है। अब एक वर्ष बीत जाने पर मुआवजा नहीं मिल पाया, जिसके चलते दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संवाद