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कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तलाशी जा रही है आईएस और अलकायदा की जड़ें

Sat, 05 Aug 2017 12:28 AM IST
amarujala.com- Written by: श्रेयांश त्रिपाठी
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जाकिर मूसा के अलकायदा से नाम जुड़ने की खबरों के बीच हरकत में आई सुरक्षा एजेंसियों ने घाटी में आईएस तथा अलकायदा की जड़ें तलाशनी शुरू कर दी हैं। दक्षिणी कश्मीर के साथ ही श्रीनगर में भी इसके लिंक ढूंढे जा रहे हैं। माना जा रहा है कि मूसा का इन क्षेत्रों में प्रभाव है।
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इस वजह से कुछ युवक इन आतंकी संगठनों में शामिल हो सकते हैं। राज्य पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि किसी भी आशंकाओं को नकारा नहीं जा सकता है। इस वजह से जांच कराई जा रही है ताकि इन संगठनों के अस्तित्व तथा इनमें शामिल होने वालों का पता लगाया जा सके। मूसा की घेराबंदी को ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। 

पुलिस विभाग के सूत्रों ने बताया कि जाकिर मूसा के साथ पांच से छह आतंकी हैं। अन्य 20-25 लोगों पर संदेह है कि वे मूसा से प्रभावित हैं। मूसा खासकर दक्षिणी कश्मीर के त्राल इलाके में अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा है। पिछले दिनों श्रीनगर के बाहरी इलाके में भी इसकी मौजूदगी की सूचना मिली थी। 
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हालातों पर सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी नजर

भारतीय सेना - फोटो : File Photo
बडगाम में मुठभेड़ में मारे गए श्रीनगर के आतंकी के जनाजे में मूसा के पक्ष में नारे लगे थे। इसके साथ ही उसके शव को आईएस के झंडे में लपेटा गया था। इससे माना जा रहा है कि श्रीनगर के कुछ युवक मूसा से प्रभावित हो सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियां इन कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।

ऐसे युवकों पर पैनी निगाह रखी जा रही है, जिनकी गतिविधियों पर संदेह है तथा जिनका नाम पत्थरबाजी एवं प्रदर्शनों के दौरान ग्रेनेड व पेट्रोल बम फेंकने में सामने आया है। लश्कर और हिजबुल के लिए काम करने वाले ओजीडब्ल्यू पर भी नजर है। 

मूसा का हिजबुल मुजाहिद्दीन में बढ़ रहा था प्रभाव

फाइल फोटो
सूत्रों के अनुसार बुरहान का करीबी रहने के कारण मूसा का हिजबुल में भी प्रभाव रहा था। हिजबुल के मददगारों में भी उसकी पकड़ है। इस वजह से माना जा रहा है कि जाकिर मूसा संगठन को मजबूत करने के लिए स्थानीय युवकों की भर्ती कर सकता है। सभी पहलुओं को लेकर जांच की जा रही है ताकि किसी प्रकार की चूक न रह पाए।

ज्ञात हो कि मूसा को अलकायदा का चीफ बनाए जाने को लेकर फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं है। डीजीपी डा. एसपी वैद ने शुक्रवार को कहा था कि इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। आतंकी चाहे किसी भी संगठन का है वह आतंकी ही होगा और उसके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाएगा।

अलकायदा का नाम सामने आने के बाद घाटी में आतंकी संगठनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज होने की आशंका है। लश्कर तथा हिजबुल दोनों ने ही अलकायदा तथा आईएस जैसे संगठनों की मौजूदगी को दरकिनार किया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में आतंकी संगठन अपना प्रभाव दिखाने के लिए आतंकी गतिविधियों को अधिक से अधिक अंजाम दे सकते हैं। 
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अलगाववादियों ने भी खतरा बताया

कश्मीर के अलगाववादी नेता - फोटो : File Photo
अलगाववादियों ने भी घाटी में आईएस तथा अलकायदा की मौजूदगी की आशंका को कश्मीर आंदोलन के लिए खतरा बताया है। उनका कहना है कि दोनों संगठनों का उद्देश्य जिहाद तथा शरिया है। केंद्र सरकार की ओर से आंदोलन को कमजोर करने के लिए इस प्रकार का दुष्प्रचार किया जा रहा है। 
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