केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की गलवां घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच फिर तनाव बढ़ गया है। गलवां घाटी 1962 के भारत-चीन युद्ध का केंद्र बिंदु रही है। बीते पांच और छह मई को ही भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच झड़पें हुई थीं। इसमें दोनों तरफ के जवान घायल हुए थे। इसके बाद से भारत ने अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों को इलाके में तैनात कर दिया है। वहीं, चीन की ओर से भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य गतिविधियां बढ़ाई गई हैं।
सोमवार को चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारत पर एलएसी के पास रक्षा ढांचे बनाने और अक्साई चिन में स्थित गलवां घाटी की वास्तविक नियंत्रण रेखा को लांघने का आरोप लगाया। इसके बाद लद्दाख में भारत-चीन के बीच तनाव की सूचनाएं आ गईं।
उधर, मई के पहले पखवाड़े में चीनी सैनिकों से झड़पों के बाद भारतीय सेना ने पैंगोंग झील से सटे इलाके में अतिरिक्त तैनाती कर अपनी स्थिति को खासा मजबूत किया है। दोनों तरफ से बढ़ीं सैन्य गतिविधियों से अभी भी तनाव की स्थिति बनी हुई है।
चीनी मीडिया ने कहा, नहीं बनेंगे दोकलाम जैसे हालात
दिन को भारतीय सेना पर एलएसी लांघने और रक्षा ढांचे बनाने का आरोप लगाने वाले चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने शाम को ट्विटर हैंडल पर लिखा ‘गलवां घाटी क्षेत्र का टकराव दूसरा दोकलाम गतिरोध नहीं बनेगा। भारत केवल कोरोना के चलते बन रहे दबाव को लेकर लोगों का ध्यान भटकाना चाहता है। इलाके में चीन बेहतर स्थिति में है और भारत इसे और आगे नहीं बढ़ाएगा।’