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फिर सुलग पड़ी घाटी, कई इलाकों में रहा बंद

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घाटी के बड़गाम जिले के छत्तरगाम इलाके में हुए गोलीकांड के एक साल पूरा होने पर जिले के नौगाम और उसके आसपास के इलाकों में बंद रहा। इस दौरान कई जगहों पर उग्र प्रदर्शन हुए। पाकिस्तान व लश्कर के झंडे लहराए गए।
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बंद के चलते नौगाम, गुलशन नगर, नाइक बाघ, बानापुरा और बाईपास के क्षेत्रों में सभी दुकानें, स्कूल आदि बंद रहे और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।इलाके में लोगों द्वारा जुलूस निकाला गया, जिसमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं।

प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर लेकर सेना के जवानों के खिलाफ सख्त सजा की मांग की। इसी दौरान सैकड़ों युवा भी सड़क पर उतर आए और आजादी के हक में नारे लगाने लगे।
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प्रदर्शनकारी युवाओं द्वारा सुरक्षा बलों पर जमकर पत्थरबाजी की गई। हालात को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इलाके में देर शाम तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
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गलतफहमी में मारे गए थे कश्मीरी

गौरतलब है कि तीन नवंबर 2014 को कार में सवार होकर पांच किशोर अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान सेना की 53 राष्ट्रीय रायफल की पेट्रोलिंग पार्टी द्वारा कार पर शक के आधार पर नौगाम के छत्तरगाम इलाके में गोलीबारी की गई।

घटना में फैसल यूसुफ भट और मेहराजुद्दीन डार की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि दो युवक घायल हो गए और एक भाग निकला था। इस घटना के बाद घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था और सेना को अपनी गलती माननी पड़ी थी।

इस घटना की जांच में 14 सैनिकों की जांच की गई लेकिन केवल चार मानक संचालन प्रक्रियाओं का उल्लंघन करने के दोषी पाए गए जिनके खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
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