पहलगाम हमले के बाद एलओसी पर तनाव बढ़ गया है, जिससे सीमावर्ती गांवों के लोग फसल छोड़कर बंकरों की मरम्मत और सुरक्षा तैयारियों में जुट गए हैं। रात की गोलीबारी के डर से लोग सामुदायिक बंकरों और अस्थायी आश्रयों में शरण ले रहे हैं।
पहलगाम हमले के बाद नियंत्रण रेखा पर तनाव की स्थिति है। जंग की आशंका बनी हुई है। सीमावर्ती गांवों के लोग डरे हुए हैं। फसल कटाई के इस सीजन में वह यह काम छोड़कर सुरक्षा तैयारियों में जुटे हुए हैं। उत्तरी कश्मीर के सीमांत जिले बारामुला के उड़ी सेक्टर में एलओसी के करीब स्थित है चुरुंडा, सुल्तान डकी और थजल गांव।
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सीमा के बेहद करीब स्थित ये गांव लंबे समय से सीमापार से होने वाली गोलीबारी के लिए संवेदनशील रहे हैं। हाल ही में तनाव में वृद्धि, विशेष रूप से पहलगाम आतंकी हमले ने यहां के नागरिकों के बीच भय फिर से जगा दिया है। चुरुंडा और थजल के ग्रामीणों ने रात में गोलीबारी की सूचना दी है, जिससे कई लोग मौजूदा सामुदायिक बंकरों या अस्थायी आश्रयों में सुरक्षा की तलाश कर रहे हैं।
यहां चालू बंकरों की संख्या बेहद कम है, जिससे आबादी का एक बड़ा हिस्सा खतरे में है। स्थिति को ध्यान में रखते हुए कई लोग अपने परिवारों की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान बनाए गए भूमिगत आश्रयों की मरम्मत में जुटे हैं। तनाव बढ़ने या जंग होने की स्थिति को देखते हुए वह कंबल, बिस्तर, अनाज जैसी आवश्यक वस्तुओं से इन बंकरों को भर रहे हैं।