फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Attack: दोनों ओर पाकिस्तान सीमा, एक ओर चिनाब; रात की फायरिंग से लोगों में दहशत, बेटी रोज पूछती ठीक हो ना बाबा?

Fri, 02 May 2025 01:53 PM IST
निकिता गुप्ता जतिन्दर सिंह अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू

सार

परगवाल गांव में हालात तनावपूर्ण हैं, जहां पाकिस्तान से फायरिंग के बाद लोग डर और चिंता में जी रहे हैं। यहां के निवासी शांति की उम्मीद करते हैं, जबकि उनके पास सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं हैं और फसल की कटाई भी प्रभावित हो रही है।
विज्ञापन
गिरधारी लाल बेटी से बात करते हुए - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जम्मू जिले का सीमावर्ती इलाका परगवाल में जब आप कदम रखते हैं, और खेतों में दूर तक नजर दौड़ाएं तो पाकिस्तान का लहराता झंडा यह अहसास कराता है कि हम पाकिस्तान सीमा के एकदम करीब हैं। दोनों तरफ पाकिस्तान की सीमा है और इसी के एक तरफ चिनाब नदी है, जो यहां से आने-जाने का एकमात्र रास्ता है।

विज्ञापन


कुछ इस तरह की संवेदनशील भौगोलिक संरचना वाले इस इलाके के लोग पहलगाम हमले के बाद बने हालात में हाई अलर्ट पर हैं।बीते मंगलवार की रात को पाकिस्तान की तरफ से परगवाल सेक्टर की अग्रिम सीमा चौकी को निशाना बनाकर फायरिंग की गई थी। इसका भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया था।

परगवाल इलाका - फोटो : अमर उजाला
रात की फायरिंग से किसानों में दहशत
खेतों में फसलों की कटाई में जुटे ग्रामीण राजू सिंह मंगलवार की रात के बारे में बताते हुए कहते हैं, रात करीब साढ़े आठ और नौ बजे के बीच फायरिंग की आवाज आई। हम खेतों में काम कर रहे थे, काम छोड़कर घरों को लौट आए।

हालांकि हमारी सेना उन्हें करारा जवाब दे रही है, फिर भी हमारे परिवार और सगे-संबंधी, जो यहां से बाहर रहते हैं, उनका मन आशंकाओं से घिरा है। 40 प्रतिशत ही फसल कट पाई है, दरअसल आधा ध्यान तो इसमें लगा रहता है कि कहीं फायरिंग न शुरू हो जाए। हम सब किसी तरह से फसल समेटने में लगे हैं। 

शरहद पर शांति को लेके बात करती महिलायें - फोटो : अमर उजाला
35 गांव और 25 हजार की आबादी, सभी की एक ही इच्छा- शांति
35 गांव, 25 हजार की आबादी अब नहीं चाहिए सरहद पर अशांतिगांव निकोवाल के गिरधारी लाल साइकिल पर चाय लेकर खेतों में काम कर रहे बेटों को देने जा रहे थे। बात पाकिस्तान, पहलगाम की आई तो बोले, परगवाल में 35 गांव हैं और लगभग 25 हजार के करीब आबादी है।

किसी भी घर में चले जाइए, सब बस सीमा पर शांति चाहते हैं, किसी को अशांति नहीं चाहिए। हम सब खुशी-खुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे, पहलगाम पर हमले के बाद सभी की बेचैनी बढ़ी है।

गिरधारी लाल बेटी से बात करते हुए - फोटो : अमर उजाला
फायरिंग के बाद बेटी का बार-बार चिंता जताना
बेटियां फोन कर पूछ रहीं, कैसे हैं आप सबकुछ आगे बढ़ने पर घर के दरवाजे पर चारपाई डाल बैठे गांव पिंडी के बुजुर्ग गिरधारी लाल फोन पर बात कर रहे थे। बैठने का इशारा करते हुए फोन पर ही जवाब दे रहे थे, यहां सब ठीक है, फायरिंग हुई थी, पर घबराने की बात नहीं है। फोन पर बात समाप्त करने के बाद वो हमसे मुखातिब हुए, बेटी का फोन था।

दिन में दस बार फोन करती है, जब से फायरिंग का सुना है। सबसे बड़ा खतरा तो छोटे बच्चों को है। यहां से निकलने का एकमात्र रास्ता फायरिंग रेंज में आता है।

यह खबर भी पड़ें: Terrorist: IC-814 हाईजैक कांड में था शामिल; पाकिस्तान में बैठे आतंकी मुश्ताक जरगर व 20 मददगारों के घर तलाशे

हमारे पास छिपने की भी जगह नहीं..बिना बंकर वाले गांवों में दहशत का माहौल
हमारे पास छिपने की भी जगह नहींगिरधारी लाल के घर के बाहर विपिन और सचिन शर्मा मिले। कहते हैं, हमने पाकिस्तान को नागरिकों को निशाना बनाते देखा है। हमारे पास छिपने की भी कोई जगह नहीं है। कुछ ऐसे गांव भी हैं, यहां अभी तक बंकर नहीं बने हैं, वहां प्रशासन को बंकर बनाना चाहिए।

बलविंदर चौधरी कहते हैं, वर्ष 2019 में घर के आंगन में मोर्टार बम गिरा था। मैं घायल हुआ था। वो यादें डराती हैं। मेरा मानना है कि पाकिस्तान को सबक तो सिखाना चाहिए। 
विज्ञापन

सीमा की ओर टकटकी लगाए, डर में जी रहे लोग
गांव में जिधर से भी गुजरो घर के बाहर कुर्सी डाले बैठीं महिलाओं की चर्चा का विषय फायरिंग और हमला है। चिंता इस बात की है कि यदि हालात बिगड़े तो क्या...। एक बुजुर्ग महिला, जो कुछ मोहल्ले की औरतों के साथ बैठी थीं, ने कहा, "हम दिन-रात चिंता के साथ सीमा की तरफ देखते रहते हैं, हमारे छोटे-छोटे बच्चे हैं। हम सिर्फ यही दुआ करते हैं कि हालात न बिगड़ें।

यह खबर भी पढ़ें: गोलियों की गूंज से पहले की खामोशी: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच सहमे केरन सेकटरवासी, कर रहे अमन की दुआ

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें