श्रीनगर में जन्म से नेत्रहीन दो भाई रहते हैं। जो अपनी रोजी-रोटी का जुगाड़ खुद काम करके करते हैं। दोनों भाई रजाई बनाने का काम करते हैं। यह दोनों भाईयों ने बताया कि उन्होने यह काम अपने पिता से सीखा क्योंकि पिता नहीं चाहते थे कि हम दोनों भाई भीख मांगकर खाए।
श्रीनगर इलाके में रहने वाले गुलाब नबी तेली और मोहम्मद हुसैन दो भाई रहते हैं। दोनों भाई जन्म से दृष्टिबाधित हैं, लेकिन दोनों अपनी आजीविका रजाई बना कर चलाते हैं। चूंकि रजाई बनाना कोई बहुत बड़ी बात नही है, लेकिन आंखों से देख न पाने के बावजूद भी यह दोनों रजाई सिल लेते है। यह अपने आप में बड़ी बात है। जब दोनों भाईयों से इस बारे में बात की गई तो इन्होंने बताया कि यह काम हम लोगों ने अपने पिता से सीखा हैं। हम लोग जन्म से नेत्रहीन हैं और पिता जी नही चाहते थे कि हम दोनों किसी के आगे हाथ फैला कर भीख मांगें। इसलिए पिताजी ने ही हम दोनों को रजाई बनाने का काम सिखाया और आत्मनिर्भर बनाया।