दक्षिण कश्मीर का अनंतनाग जिला, जिसकी पहाड़ियों पर बसी तेथन गुज्जर बस्ती में वीरवार के पल खुशियों का उजियारा लेकर आए, जब ग्रामीणों ने पहली बार गांव में बल्ब जलता देखा। आजादी के 75 साल बाद यह गांव बिजली नेटवर्क से जुड़ पाया है। अब तक इस गांव के लोग लकड़ी, दीपक और मोमबत्ती की रोशनी पर ही निर्भर थे।
बिजली विभाग और जिला प्रशासन के अथक प्रयासों से अनंतनाग जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में बल्ब जले हैं। ग्रामीणों के चेहरों पर बिजली की रोशनी देखकर मुस्कान देखते ही बनती थी। उन्होंने नाच-गाकर खुशी मनाते हुए एक-दूसरे को बधाई दी। लोगों का कहना है कि अब उनके बच्चों को पढ़ाई करने में कोई परेशानी नहीं होगी। रात को वे अपने घरों का काम आसानी से निपटा सकेंगे।
जिले के इस क्षेत्र को केंद्र प्रायोजित योजना पीएम डेवलपमेंट पैकेज (पीएमडीपी) के तहत कवर किया गया है। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लांच की थी। गांव में दो ट्रांसफार्मर, 38 एचटी और 57 एलटी खंभे (कुल 95 खंभे) लगाए गए हैं, जिनसे गांव के 60 घर रोशन हुए हैं। बिजली विभाग के अधिकारी ने बताया कि इस दूरस्थ क्षेत्र में विद्युतीकरण की प्रक्रिया को तेजी से ट्रैक कर गांव तक बिजली पहुंचाई है। इससे गांव की करीब 200 की आबादी को लाभ पहुंचा है।
टेथन टॉप के निवासी फजूल खान ने कहा कि हमारी परेशानियां अब जाकर कम हुईं हैं। बिजली पहुंचाने के लिए सरकार और बिजली विभाग के आभारी हैं। मुश्ताक अहमद ने कहा कि उनसे पहले की पीढ़ियां विद्युतीकरण का चमत्कार नहीं देख सकीं। आज हम भाग्यशाली हैं कि सरकार ने बिजली प्रदान की है।