- सरकारी खरीद में गड़बड़ी पर नकेल, वित्त विभाग ने दिए कड़े निर्देश
- पासवर्ड साझा करने, सभी दस्तावेजों पर डिजिटल हस्ताक्षर अनिवार्य
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। वित्त विभाग ने सरकारी खरीद पोर्टल जेम पर बढ़ रही हेराफेरी को रोकने के लिए सभी विभागों को कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। विभाग ने हर विभाग में सतर्कता इकाई गठित करने का आदेश दिया है जो जेम से जुड़े सौदों की नियमित जांच करेगी। विभाग के सामने हाल में मिली शिकायतों में सामने आया था कि कुछ अधिकारी और कर्मचारी सप्लायरों के साथ मिलकर बोली प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे थे। कई मामलों में खरीद और बोली लगाने वाले एक-दूसरे से पासवर्ड साझा कर रहे थे, जिससे प्रतिस्पर्धा खत्म हो रही थी और तय सप्लायरों को फायदा पहुंचाया जा रहा था।
वित्त विभाग ने साफ किया है कि अब किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्देशों के अनुसार, सरकारी खरीद से जुड़े हर दस्तावेज पर डिजिटल हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गुंजाइश न रहे। बोली में संदिग्ध पैटर्न या मिलीभगत को पहचानने के लिए तकनीकी साधनों का उपयोग किया जाएगा और संदेहास्पद सप्लायरों को समय रहते काली सूची में डालने के निर्देश दिए गए हैं। अधिक राशि वाली खरीद में विक्रेता का पता, गोदाम और सामान की मौके पर जांच अनिवार्य होगी। बोली लगाने वालों के दस्तावेज, जीएसटी, पैन और अन्य विवरणों की पूरी जांच के बाद ही आदेश जारी किए जाएंगे। बोली प्रक्रिया से पहले बाजार सर्वे करना भी आवश्यक होगा ताकि वास्तविक कीमत का पता चल सके और दिखावटी बोली लगाने वाले पकड़े जा सकें।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जेम पर की जाने वाली हर खरीद सामान्य वित्त नियमावली, सरकारी खरीद पुस्तकों और केंद्रीय सतर्कता आयोग के निर्देशों के अनुसार ही होनी चाहिए। बिना ठोस कारण किसी वर्ग के विक्रेता को बाहर रखने या मनमानी शर्तें जोड़ने पर सख्त रोक है। मिलीभगत से बोली प्रभावित होने की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई के साथ अनुबंध को तत्काल समाप्त किया जा सकेगा। हर विभाग में शिकायत निवारण प्रणाली भी स्थापित होगी, ताकि कर्मचारी, विक्रेता या आम नागरिक की शिकायतों का समयबद्ध समाधान हो सके। वित्त विभाग ने चेतावनी दी है कि खरीद को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर बोली प्रक्रिया से बचने की कोशिश पूरी तरह गैरकानूनी है। उदाहरण देते हुए कहा गया कि 12 लाख की खरीद को 4-4 लाख में बांटकर प्रक्रिया से बचना नियमों का उल्लंघन है, और ऐसे मामलों की तुरंत सूचना सतर्कता शाखा को देनी होगी। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।