प्राकृतिक आपदा में प्रदेश में अब तक पांच हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। इस अनुमान को हकीकत में आंकने का काम शुरू हो चुका है। इसे दो चरण में पूरा किया जाना है। अब तक एसडीआरएफ से 121 मृतकों के आश्रितों को मुआवजा देने की घोषणा की जा चुकी है।
वहीं भवन, जमीन, फसल, बिजली उपकरण, मवेशियों सहित अन्य कीमती सामान के नुकसान की रिपोर्ट राजस्व विभाग के पटवारी तैयार करेंगे। इस रिपोर्ट को प्रदेश भर में तहसील और उपमंडल स्तर पर जुटाने के बाद उपायुक्त को भेजा जाएगा।इस बार आपदा का सबसे ज्यादा असर जम्मू संभाग में हुआ है। इसमें जम्मू शहर, किश्तवाड़, उधमपुर, रियासी, कटड़ा, कठुआ, रामबन शामिल हैं। इन जिलों में बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन से जानमाल का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने निर्देश दिए हैं।
गुज्जरनगर में अपने घर से मलबा निकालती महिला।
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आ सकते हैं प्रधानमंत्री मोदी
आपदा के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके बाद गृह मंत्री अमित शाह प्रदेश का दौरा कर चुके हैं। अब नुकसान का आकलन होने और रिपोर्ट तैयार होने के बाद राहत पैकेज देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद आ सकते हैं। प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है। इससे पहले 2014 में आई बाढ़ के दौरान भी प्रधानमंत्री जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे।
चिशोती में थमा तलाशी अभियान
किश्तवाड़ के चिशोती में लापता लोगों को मलबे में तलाशने का अभियान फिलहाल रोक दिया गया है। सेना, एनडीआरएफ और सीआईएसएफ समेत एसडीआरएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस साझा तलाशी अभियान चला रही थी। मलबे से 65 शव बरामद किए गए थे जबकि तीन की बाद में मौत हो गई थी।