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आप शंभू के दर्शन से दूर होते हैं भक्तों के दुख

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आप शंभू की शरण में जो भी भक्त पहुंचता है, उसके दुख-दर्द दूर होते हैं। भक्तों को आध्यात्मिक सुख मिलता है। आप शंभू महादेव मंदिर जम्मू के रूपनगर सथरें पलौड़ा में स्थित है। मंदिर की देखरेख बाबा जमुनादास कमेटी पलौड़ा द्वारा की जाती है। महाशिवरात्रि की तैयारियां यहां पर महीने भर से हो रही हैं।
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दस साल से नवनिर्मित दक्षिण भारतीय शैली में इस मंदिंर का भव्य प्रवेश द्वार दूधिया रंग में चमक रहा है। पूरे मंदिर परिसर के  रंग-रोगन, सफाई, मंदिर गर्भगृहों और भवनों की सजावट करने में कारीगर जुट चुके हैं। महादेव की पूजा करने वाले भक्तों की तांता सोमवार और शनिवार को यहां खूब देखा जाता है।

हालांकि इस विशेषकर मांगलिक कार्य के लिए वर-वधू या कश्मीरी पंडित जनेऊ संस्कार के लिए परिवार सहित इस पवित्र स्थान पर पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के पहले से ही यहां पर महाशिवरात्रि की रौनक दिखने लगी है। रंग-बिरंगी लाइट लगाई जा रही हैं। मंदिर को विधिवत सजाया जा रहा है। प्रधान पंडित द्वारिकानाथ जोगी बताते हैं कि इस आपशंभू मंदिर की महिमा देश-विदेश तक है।
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इस मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सोलह फरवरी को कश्मीरी लोग यहां पर रात भर पूजा-अर्चना करेंगे। मेडिकल कैंप भी यहां पर दो दिनों के लिए लग रहा है। महाशिवरात्रि शिवभक्तों के  द्वारा विशेष पूजा उपासना की जाती है। यहां पर पूरे जम्मू कश्मीर से लेकर पंजाब आदि क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

आपशंभू मंदिर की अद्भुत परंपरा
आपशंभू शिवलिंग प्राकृतिक है। शुक्ल पक्ष में भूरे रंग में यह शिवलिंग होता है, जबकि  कृष्ण पक्ष में थोड़ा भूरेपन से हलका डार्क हो जाता है। आपशंभू महादेव मंदिर के पहले प्रधान पुजारी कृष्णनाथ रहे हैं और उनके बाद प्रधान पंडित द्वारिकानाथ जोगी हैं। पूजा विधान में सोमवार को 21 ज्योतियों से शिवलिंग की आरती होती है, जबकि अन्य दिन सात ज्योत से।
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आपशंभू मंदिर का इतिहास

पंडित द्वारिका नाथ जोगी का कहना है कि महाराजा प्रताप सिंह जब जम्मू कश्मीर में राज करते थे, तभी से यह मंदिर है। गुज्जर लोग पशु चराने के लिए यहां आते थे। जहां शिव की पिंडी है वहां पर भूरे रंग की भैंस खड़ी हो जाती थी और उसका दूध अपने आप निकलने लगता था।

घर में जब गुज्जर भैंस से दूध निकालता तो नहीं निकलता। मालिक को शंका हुई। वह एक दिन भैंस के पीछे आया और देखा कि कौन भैंस का दूध निकालता है। जब भैंस पिंडी के पास खड़ी होकर जब स्वयं दूध निकालने लगी तो वह अचंभित हुआ। उस पत्थर की पिंडी को हटाने का असफल प्रयास गुज्जर ने किया।

पिंडी नहीं हटी तो उसने गुस्से में कुल्हाड़ी से वार कर दिया, जिससे पत्थर की पिंडी खंडित हो गई और वहां से खून निकलने लगा। गुज्जर डर गया और तब तक वह अंधा हो चुका था। हिम्मत के साथ घर पहुंचा तो घर राख हो चुका था। आसपास के लोगों को यह बात बताई, तो लोग भूत-प्रेत की शंका करने लगा।

बात फैलती गई, तभी भगवान शिव प्रकट हुए। यह खबर महाराजा प्रताप सिंह तक पहुंची और वे जंगल की ओर चल पड़े और देखा कि पिंडी स्वरूप शिवलिंग है। उस पिंडी की खुदाई करवाई जाने लगी, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली। रात को महाराज को सपना आया और शिव ने दर्शन दिए। वहीं भगवान ने कहा कि हम जंगल के वासी हैं, हमें जंगल में ही रहने दें।
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