वहीं सुरक्षा एजेंसियों की जांच में राजनीतिक कारण प्रमुख रूप से सामने आया है। इसमें बांग्लादेश से लेकर दिल्ली और फिर जम्मू-कश्मीर तक एक मजबूत नेटवर्क की संलिप्तता भी उजागर हुई है। जम्मू शहर, सांबा, कठुआ, आरएसपुरा, सुचेतगढ़, अखनूर, पुंछ, राजोरी, बारामुला व कुपवाड़ा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इनके आबाद होने की कहानी भयावह तस्वीर तैयार कर रही है।
जम्मू संभाग से लगती नियंत्रण रेखा (एलओसी) व अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) से जुड़े क्षेत्रों में बांग्लादेशी और रोहिंग्या की मौजूदगी पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद्य कहते हैं कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा व सीमांत क्षेत्रों की सामाजिक संरचना से जुड़ा हुआ है। स्थानीय आबादी में घुलमिल जाने के कारण इनकी पहचान और निगरानी मुश्किल होती है।
जम्मू-कश्मीर में इनकी बढ़ती संख्या सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की आशंका को बढ़ाती है। संवेदनशील प्रतिष्ठानों और सैन्य गतिविधियों से जुड़े क्षेत्रों के निकट इनकी बसावट बड़े खतरे का कारण बन सकती है। ये फर्जी दस्तावेज के माध्यम से सरकारी योजनाओं और नागरिक सुविधाओं तक पहुंच बनाने की भी कोशिश कर रहे हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में अस्थायी बस्तियों का विस्तार भी बड़े खतरे की ओर संकेत करता है। इस चुनौती से निपटने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, डिजिटल पहचान प्रणाली का प्रभावी उपयोग, दस्तावेज सत्यापन की मजबूत व्यवस्था भी करनी होगी।
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों व रोहिंग्या का उपयोग देश विरोधी गतिविधियों में हो सकता है। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी हमले में इनका उपयोग कर सकते हैं। यही कारण है कि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है।
हालात की गंभीरता को यूं समझिए
- 2012–2013: संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से 2012 में तीन बांग्लादेशी नागरिकों के डिपोर्टेशन का रिकॉर्ड दर्ज है। बड़ा सवाल, आखिर बांग्लादेशी घुसपैठिए यहां तक कैसे पहुंचे।
- 2017–2018: केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान, हिरासत और राष्ट्रीयता सत्यापित होने के बाद ही उन्हें उनके देश भेजा जाता है। बांग्लादेश के साथ इस विषय पर प्रत्यर्पण संधि नहीं है।
- 2019 के बाद: जम्मू-कश्मीर में किरायेदार सत्यापन, मजदूरों का पंजीकरण और संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए अभियान चलाया गया। पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क का भी खुलासा किया।
- 2026: बीएसएफ ने पांच जनवरी 2026 को जम्मू जिले के गजनसू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट 19 वर्षीय बांग्लादेशी शरीफुल इस्लाम भुइया को पकड़ा। जांच में अंतरराज्यीय नेटवर्क से संबंध सामने आए।