जम्मू, आरएसपुरा, बिश्नाह और सांबा के कंडी इलाकों के लोगों के सूखे कंठ तर करने और कृषि क्षेत्र के लिए बनाई गई ऐतिहासिक रणबीर नहर एक मिसाल है। महाराजा प्रताप सिंह ने अपने पिता महाराजा रणवीर सिंह की स्मृति में इस नहर का निर्माण कराया। इसके निर्माण में पूरे 20 साल लगे। इसकी खासियत यह है कि इसको साइफन सिस्टम के जरिए तवी नदी की तलहटी के नीचे से निकाला गया है।
सन 1885 में अखनूर से गहरी नाली खोदने के साथ इसकी शुरुआत हुई और 1905 में निर्माण पूरा हुआ। सिंचाई विभाग जम्मू के अधिकारी लालमण शर्मा ने बताया कि 1880 तक जम्मू, आरएसपुरा, बिश्नाह, सांबा की जनता केवल बारिश के पानी पर निर्भर थी। बारिश कम होती थी तो तालाब तक सूख जाते थे।
ऐसे में महाराजा प्रताप सिंह ने अखनूर में चिनाब दरिया का पानी कंडी इलाकों में पहुंचाने का संकल्प लिया था। कुछ किलोमीटर तक जब गहरी नाली का प्रयास सफल रहा तो महाराजा ने इसे नहर का रूप दिलवाया।
उस समय उन्होंने विदेशों से इंजीनियरों को बुलाकर नहर की डिजीइन बनवाई। तवी नदी के नीचे करीब तीन सौ मीटर लंबी अंडर ग्राउंड नहर निकाली गई। इस नहर से आरएसपुरा, बिश्नाह, सांबा के करीब 400 गांवों तक सिंचाई का पानी पहुंच गया। तवी नदी से अंडर ग्राउंड नहर को निकालने के लिए तांबे के ढोलों का प्रयोग किया गया।