भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील कश्मीर के पीरपंजाल क्षेत्र में 50 साल बाद एक बड़ा भूकंप आभनने की आशंका है। यह रिक्टर स्केल पर 8 या उससे अधिक का हो सकता है।
हालांकि भूकंप की सटीक भविष्यवाणी कर पाना संभव नहीं है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि यह ठीक 50 साल बाद ही आएगा, लेकिन हिमालयी क्षेत्र में पूर्व में आए ऐतिहासिक भूकंपों के ट्रेंड को देखते हुए इसकी आशंका बनी हुई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मुजफ्फराबाद में 2005 और 1905 में कांगड़ा में आए शक्तिशाली भूकंप की वजह से 75 किलोमीटर चौड़ाई और तीन से सात मीटर लंबवत भूगर्भीय प्लेटें ध्वस्त हो गई थीं।
इस इलाके में नहीं आया एक हजार साल से भूकंप
मुजफ्फराबाद में भारतीय माप के मुताबिक रिक्टर स्केल पर करीब 7.6 और अमेरिकन जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक रिक्टर स्केल पर 7.8 का भूकंप आया था। इसका असर करीब 2500 किलोमीटर था।
शिवालिक रेंज के कांगड़ा में भी रिक्टर स्केल पर 7.8 का बेहद शक्तिशाली भूकंप आया था। दोनों भूकंप भविष्य के लिए इसलिए भी खतरनाक हो गए कि प्लेटों का यह विध्वंस बालाकोट बाग फॉल्ट से सटा हुआ है।
इन भूकंपों केकारण बालाकोट बाग फॉल्ट दक्षिण पूर्व दिशा में दाहिनी तरफ खिसक गया। इसी के साथ रियासी के नीचे प्लेट को यह लगातार धकेल रहा है। यह पूरा इलाका ऐसा है जहां पिछले एक हजार साल में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है।
हालांकि 1555 में पीरपंजाल के ऊपरी हिस्से में रिक्टर स्केल पर 7.6 का भूकंप आया था। इससे हुए नुकसान की व्यापकता को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि यह 7.6 रिक्टर स्केल का रहा होगा। हिमालय के तीनों कश्मीर गैप, सेंट्रल गैप और आसाम गैप में बड़े भूकंप 500 से 1000 साल के बाद ही आते हैं। करीब 50 साल बाद बड़े भूकंप की आशंका बनी हुई है।
जेयू भूगर्भ विभाग कर रहा मॉनिटरिंग: प्रो. भट
भूगर्भ विभाग जम्मू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जीएम भट ने बताया कि पीरपंजाल इलाके में कुछ फाल्ट एक्टिव हैं। हल्के भूकंप आने की आशंका बनी हुई है, लेकिन निकट भविष्य में किसी बड़े भूकंप की आशंका नहीं है।
भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा रियासत की सरकार की मदद से पूरे जम्मू कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में आबजर्वेट्री की मदद से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
अब जीपीएस प्रणाली का भी इस्तेमाल किया जाएगा। यह आबजर्वेट्री पुंछ, राजोरी, बनी, जेयू कैंपस, कश्मीर, वेरनाग और टंगधार में 2009 से काम कर रही हैं। भद्रवाह में इसी साल एक और आबजर्वेट्री स्थापित की गई है।