मीरां साहिब में सीमा सुरक्षा बल की 94वीं बटालियन के इंस्पेक्टर रतीराम की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली चलने से मौत से जीएमसी में दिनभर अफरातफरी का माहौल रहा। घायल हालत में जीएमसी पहुंचाए जाने के दौरान गेट पर डाक्टरों का अमला पहले से ही कवर करने को तैयार था।
इंस्पेक्टर की मौत के बारे में जानकारी देने के लिए अधिकारी चुप्पी साधे रहे। कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं था।
जीएमसी में मौजूद अधिकारी उच्च अधिकारियों के आने का इंतजार करते रहे। बीएसएफ की जिप्सी में गोली चलने से रतीराम और एसआई रामजी ठाकुर को गोली लगी थी, जिसमें रतीराम ने जीएमसी में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। एसआई को सीने के ऊपर बांह के पास गोली लगी है।
गंभीर हालत में उसकी इलाज चल रहा है। दरअसल, घटना यूनिट के गेट से कुछ पहले बीएसएफ की जिप्सी में हुई है। जानकारी मुताबिक जिप्सी में कुल पांच लोग बैठे थे, लेकिन बाकी के लोग इस संदर्भ में कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं हैं।
जीएमसी में दिन भर अफरातफरी का माहौल बना रहा। रतीराम की मौत के बाद बीएसएफ का सारा अमला मौत से जूझ रहे रामजी ठाकुर को बचाने के लिए लगा रहा। रतीराम की मौत गोली सीने पर लगने से हुई है। मीरां साहिब में घटना के बारे में जीएमसी में डाक्टरों की टीम को पहले से ही सूचना दे दी गई थी।
जीएमसी के गेट पर पहुंचते ही डाक्टरों ने घायलों को कवर किया और इलाज के लिए अंदर ले गए। दोनों को इमरजेंसी में लाया गया। दूसरी ओर, बीएसएफ के उच्चाधिकारियों ने पलौड़ा स्थित बीएसएफ यूनिट को इस घटना के बारे में सूचित कर दिया था।
वहां से भी अधिकारी कुछ ही समय में यहां पहुंच गए थे। रामजी ठाकुर को सीटी स्कैन के लिए ले जाया गया। एसआई रामजी ठाकुर की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। डाक्टरों की टीम उनके इलाज में जुटी है।