पीएचई विभाग कश्मीर डिवीजन के चीफ इंजीनियर के अनुसार, श्रीनगर शहर में विभाग के नब्बे प्रतिशत ढांचे को बहाल कर दिया गया है। कसबों में भी डब्ल्यूएसएस को काफी नुकसान हुआ है, जिन्हें जल्द बहाल किया जाएगा। सभी जिलों में डब्ल्यूएसएस को स्थायी अथवा अस्थायी तौर पर बहाल करने के लिये 165 करोड़ की लागत आने का अनुमान है।
रंगील, अलसतेंग, निशात और दूधगंगा प्लांट पूरी तरह से काम कर रहे हैं। इन प्लांटों में नियमित तौर पर क्लोरिनेशन की जा रही है। पानी को साफ रखने के लिये उच्च तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। सोपोर, कुपवाड़ा, टंगमर्ग, पट्टन और चडूरा में इन्हें अस्थाई तौर पर ही बहाल किया गया है।
घाटी के कुरसू राजबाग, महजूर नगर और बमीना में केंद्र की तरफ चार आरओ प्लांट स्थापित किये गये हैं। 20 में से 17 आरओ प्लांट तेलंगाना सरकार की तरफ से कश्मीर में स्थापित किये गये हैं, जबकि अन्य आरओ पीरामल की तरफ से श्रीनगर, सोपोर, हजीन, लसजान और श्रीनगर के अस्पतालों में स्थापित किये गये हैं।
चीफ इंजीनियर ने श्रीनगर और बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों के नागरिकों से अपील की है कि वे अपने पानी के टैंक साफ रखें। उन्होंने लोगों से स्वास्थ्य निदेशालय द्वारा जारी सुरक्षा उपायों का पालन करने के लिये भी कहा है।