इन झुग्गियों में बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग रहते हैं। जबकि पास में ही रोहिंग्या बस्ती भी है। शुक्रवार जब आग लगी तो हवा उस तरफ थी, जिस तरफ झुग्गियों के आगे खाली मैदान था। यदि रात को हवा दूसरी तरफ होती तो पास में बनी रोहिंग्या बस्ती भी इसकी चपेट में आ जाती।
ऐसा होने पर 100 के करीब झुग्गियां और जल जातीं। वर्ष 2016 में नवंबर माह में भटिंडी इलाके में भी इसी तरह की घटना हुई थी। जब 50 से अधिक झुग्गियां जल गई थी। इसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की
पुलिस ने मामले को लेकर केस दर्ज कर लिया है। 174 के तहत मामले की जांच शुरू की गई है। जिस शख्स की यह जगह है, उसके खिलाफ भी पुलिस कार्रवाई कर सकती है। बिना अनुमति के लोगों को इस तरह से रखने पर कार्रवाई हो सकती है।
शहर में हजारों झुग्गियां बन सकती है खतरा
शहर के कई इलाकों में झुग्गियां बनी हुई हैं। इनमें श्रमिक और रोहिंग्या रहते हैं। यह सभी झुग्गियां मोम और लकड़ियों से बनी हुई हैं। इन झुग्गियों में बिजली की व्यवस्था सबसे अधिक खतरे वाली है। क्योंकि झुग्गियों के बीच aहर जगह तारें आपस में उलझी हुई हैं। एक जरा सी चिंगारी तार से निकले तो सब कुछ जल कर राख हो जाएगा। शहर में यह झुग्गियां खतरे से कम नहीं है।