केंद्रीय योजनाओं के तहत राज्य सरकारी के स्कूलों के अपग्रेडेशन को तो मंजूरी नहीं मिल रही है, लेकिन स्टेट प्लान के तहत राज्य के तीनों सभागों में सरकार ने 800 के करीब स्कूलों को अपग्रेड किया है। प्राइमरी स्कूलों को मिडिल, मिडिल को हाई और हाई स्कूलों को हायर सेकेंडरी बनाया गया है। इससे विद्यार्थियों को काफी लाभ मिला है, लेकिन इन स्कूलों में अभी सुविधाओं का अभाव है।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और सर्व शिक्षा अभियान के तहत कई बार प्रस्ताव भेजने के बाद स्कूलों को अपग्रेड नहीं किया जा सका है, लेकिन स्टेट प्लान के तहत जारी वित्त वर्ष में 800 के करीब स्कूलों को अपग्रेड किया गया है। जम्मू, कश्मीर और लद्दाख संभाग के हजारों विद्यार्थियों को इन स्कूलों के अपग्रेड होने पर लाभ मिला है।
इन स्कूलों के अपग्रेड होने पर सरकार को इस पर करीब 350 करोड़ रुपये खर्च करना है। इससे स्कूलों में नया स्टाफ नियुक्त करना, नई स्कूल की इमारतों का निर्माण करवाना, पुरानी इमारतों की मरम्मत करवाना और अन्य कई कार्य करने हैं। हालांकि इस पर अभी पूरी तरह से कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
इन स्कूलों में सबसे बड़ी परेशानी स्टाफ की है। स्कूलों को अपग्रेड करने के बाद विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा हुआ है और स्कूलों में काम बढ़ा है, लेकिन स्टाफ की कमी ने परेशानी को बढ़ा दिया है। नई इमारत न बनने के कारण मौजूदा इमारत कम पड़ गई हैं और विद्यार्थी बरामदे में बैठकर शिक्षा हासिल करने को मजबूर हैं।