जम्मू-कश्मीर में अफजल गुरू की फांसी पर एक बार फिर से बवाल शुरू हो गया है। रियासत में सरकार बनने के एक दिन बाद ही पीडीपी विधायकों ने संसद हमले की आरोपी अफजल गुरू के शव की मांग की है।
बता दें कि अफजल गुरू के शव की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है। पीडीपी विधायकों ने अफजल गुरु के अवशेषों को कश्मीर लाए जाने की मांग की है। पीडीपी विधायकों का कहना है कि अफजल गुरु की फांसी असंवैधानिक थी।
विधायकों ने अफजल गुरू की फांसी को इंसाफ के साथ मजाक करार दिया। बता दें कि इससे पहले कांग्रेस नेता शशि थरूर और गुलाम नबी आजाद ने भी अफजल गुरू की फांसी को गलत करार दिया था।
इन पीडीपी विधायकों ने की मांग
पीडीपी विधायक यावर दिलावर वीर, ऐडवोकेट मोहम्मद यूसुफ, राजा मंजूर अहमद, एजाज अहमद मीर, मोहम्मद अब्बास वानी और नूर मोहम्मद शेख ने संवेदनशील अफजल गुरु का मुद्दा उछाला है।
इन विधायकों ने एक बार फिर से अफजल गुरु के शव की मांग की है। विधायकों का कहना है कि, हमारा अफजल गुरु पर जो स्टैंड पहले था वह आज भी कायम है। हमने पहले भी अफजल गुरु की फांसी के बाद शव की मांग की थी और आज भी हम उस पर कायम हैं।
रियासत की विपक्षी पार्टी नेकां ने पीडीपी पर सनसनी फैलाने का आरोप लगाया है। नेकां का कहना है कि पीडीपी जानबूझकर रियासत का माहौल खराब करने में लगी है।
आखिर क्यों बार-बार जाग उठता है ये जिन्न
अफजल गुरु का शव उसके परिवार वालों को नहीं सौंपा गया था। तत्कालीन यूपीए सरकार ने घाटी में अशांति फैलने की आशंका के मद्देनजर शव को जेल परिसर में ही दफना दिया था। सरकार के इस कदम की पीडीपी और नेकां ने आलोचना की थी।
सरकार के इस कदम की मानावधिकार संगठनों ने भी आलोचन की थी। एक दिन पहले सरकार के शपथ ग्रहण के बाद सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद ने भी पाकिस्तान को लेकर विवादित बयान दिया था। बता दें कि रविवार को शपथ ग्रहण समारोह के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुफ्ती ने पाकिस्तान को लेकर विवादित बयान दे डाला था।
मुफ्ती ने रियासत में हुए चुनावों के लिए पाकिस्तान, हुर्रियत और आतंकियों को शुक्रिया अदा किया। इस पर तर्क देते हुए मुफ्ती ने कहा, अगर वह चुनाव के लिए अनुकूल माहौल नहीं बनाते और अशांति पैदा करते तो चुनाव नहीं हो पाते।
इस बयान पर रियासत की सियासत में बवाल मचा हुआ है। इसके बाद से भाजपा-पीडीपी गठबंधन में तनातनी खबरें भी आ रही हैं।