घाटी में डेढ़ महीने की हिंसा ने कश्मीर की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर रख दी है। आठ जुलाई के बाद से बंद, हिंसा, कर्फ्यू और पाबंदियों के बीच कारोबार चौपट हो गया है।
कश्मीर के कारोबारियों ने नुकसान का आकलन करते हुए दावा किया है कि अब तक 6400 करोड़ का नुकसान हो चुका है। सामान्य हालात में घाटी में रोजाना 135 करोड़ का कारोबार होता है। यह आकलन छह महीने पुराना है। इसका सीधा मतलब ये है कि वर्तमान में हिंसा से कारोबार को हुआ नुकसान न्यूनतम 6400 करोड़ हुआ है जो हकीकत में इससे भी अधिक हो सकता है।
कश्मीर ट्रेडर्स एंड मैनुफेक्चरर्स फेडरेशन के अध्यक्ष मोहम्मद यासीन खान के अनुसार नुकसान के ये आंकड़े न्यूनतम स्तर दर्शा रहे हैं। कश्मीर में अमूमन ऐसे हालात बनते हैं। मामले का स्थायी समाधान होना चाहिए।
सरकार को 300 करोड़ का नुकसान
उपद्रवियों पर आंसू गैस का गोला छोड़ता जवान
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कारोबारियों के साथ ही सरकार के राजस्व संग्रह पर भी व्यापक असर पड़ा है। वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने में सरकार को 300 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। टैक्स सहित राजस्व के अन्य स्रोत ठप पड़े हैं।
इसी तरह से कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीड़ पर्यटन उद्योग भी ठप पड़ा है। इससे होने वाली आय नहीं हो पा रही है। पर्यटन उद्योग से जुड़े कारोबारी ने बताया कि हिंसा की वजह से पर्यटक कश्मीर का रुख नहीं कर रहे हैं। होटलों से लेकर हाउस बोट खाली पड़ी हैं। तमाम बड़े पर्यटक स्थल सूने पड़े हैं। पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया ऐसे हालात में विभाग कुछ भी कर पाने में समर्थ नहीं है।
उल्लेखनीय है कि हिंसा के दौर में घाटी की दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान, निजी कार्यालय और पेट्रोल पंप भी बंद पड़े हैं। अलगाववादी समूहों ने दिन में बंद और रात के समय ढील देने का एलान किया है, लेकिन, सुरक्षा कारणों से रात को व्यापारिक प्रतिष्ठानों के शटर नहीं खोले जा रहे।