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सीमा पर ठंड में छह दिन के नवजात ने भी सहा विस्थापन का दर्द

Sat, 29 Oct 2016 01:43 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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सीमांत गांवों के लोग हुए विस्थापित - फोटो : File Photo
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पाक गोलाबारी से विस्थापन का दर्द अपनी मां के साथ छह दिन का एक नवजात भी सह रहा है। नापाक गोले का निशाना बनने से बचने के लिए वह अपनी मां के साथ राधास्वामी सत्संग भवन में बने कैंप में पहुंचा। ठंड से अपने और बच्चे को बचाने में लगी मंगियाल लालू सीमावर्ती इलाके की हिना का दर्द छलक उठा।
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उसने कहा कि बच्चे को जब देखभाल की जरूरत है तो उन्हें भागकर कैंप में गुजारा करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि पाक की ओर से इतनी जबरदस्त गोलाबारी होने लगी कि बचकर निकलना भी मुश्किल हो गया था। जैसे ही कुछ देर के लिए गोलाबारी थमी तो वह नवजात शिशु और आठ साल की पुत्री को लेकर यहां पहुंच गई।

बुजुर्ग सास-ससुर को भी साथ लेकर आ गई। सुबह ही वह यहां पहुंच गई थी। उनका कहना है कि ऐसी गोलाबारी पहले कभी नहीं देखी थी। गांव तक गोले गिर रहे थे। पति बच्चन सिंह ने बताया कि परिवार के अन्य सदस्यों को पहले ही सुरक्षित स्थान पर भेज दिया था।
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बाद में मवेशियों की देखभाल कर वह स्वयं भी यहां चला आया। गांव में मकान के आसपास कई गोले गिरे। ऐसे में बच्चे और परिवार को सुरक्षित रखने के लिए गांव छोड़कर आना पड़ा। नाराजगी भी जताई कि बार-बार ऐसे मौके आते हैं। इसका स्थायी हल निकाला जाना चाहिए। 
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कांग्रेस ने की विस्थापितों को सुविधाएं प्रदान करने की मांग

कांग्रेस - फोटो : File Photo
सीमा पर पाक गोलीबारी से हो रहे विस्थापितों को सरकार सुविधाएं प्रदान करे। यह बात प्रदेश कांग्रेस के उप प्रधान पूर्व मंत्री मूला राम ने कही। उन्होंने कहा कि सीमा पर बने हालात के कारण लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी है।

किसानों के पशु गोलाबारी में मर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह किसानों की फसलों से लेकर मकानों और मवेशियों के हुए नुकसान का जायजा ले और किसानों की आर्थिक मदद करे।
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