पाक गोलाबारी से विस्थापन का दर्द अपनी मां के साथ छह दिन का एक नवजात भी सह रहा है। नापाक गोले का निशाना बनने से बचने के लिए वह अपनी मां के साथ राधास्वामी सत्संग भवन में बने कैंप में पहुंचा। ठंड से अपने और बच्चे को बचाने में लगी मंगियाल लालू सीमावर्ती इलाके की हिना का दर्द छलक उठा।
उसने कहा कि बच्चे को जब देखभाल की जरूरत है तो उन्हें भागकर कैंप में गुजारा करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि पाक की ओर से इतनी जबरदस्त गोलाबारी होने लगी कि बचकर निकलना भी मुश्किल हो गया था। जैसे ही कुछ देर के लिए गोलाबारी थमी तो वह नवजात शिशु और आठ साल की पुत्री को लेकर यहां पहुंच गई।
बुजुर्ग सास-ससुर को भी साथ लेकर आ गई। सुबह ही वह यहां पहुंच गई थी। उनका कहना है कि ऐसी गोलाबारी पहले कभी नहीं देखी थी। गांव तक गोले गिर रहे थे। पति बच्चन सिंह ने बताया कि परिवार के अन्य सदस्यों को पहले ही सुरक्षित स्थान पर भेज दिया था।
बाद में मवेशियों की देखभाल कर वह स्वयं भी यहां चला आया। गांव में मकान के आसपास कई गोले गिरे। ऐसे में बच्चे और परिवार को सुरक्षित रखने के लिए गांव छोड़कर आना पड़ा। नाराजगी भी जताई कि बार-बार ऐसे मौके आते हैं। इसका स्थायी हल निकाला जाना चाहिए।