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अमन और विकास की ललक बूथों तक खींच लाई

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अमन और विकास की ललक मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक खींच लाई। बडगाम, बारामूला और पुलवामा जिले की 16 विधानसभा सीटों के लिए हुए मतदान में वोटरों के उत्साह ने सियासी पंडितों को भी चौंकाया।
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आतंकवादियों ने तीन पहले और बाद में लगातार हमले कर दहशत फैलाने की कोशिश की लेकिन धमकियां और गोलों की गूंज मतदाताओं को रोक नहीं पाई। इस बार का मतदान पिछले विधानसभा चुनाव का रिकार्ड तोड़ता नजर आया।

सोपोर हुर्रियत का किला माना जाता रहा है। यह हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी का इलाका है। वोट बहिष्कार की अपीलें इस बार जारी हुई थीं। आतंकी संगठनों की ओर से धमकियों भरे पोस्टर भी लगाए गए थे।
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लेकिन जम्हूरियत के प्रति आस्था इतनी गहरी नजर आई कि आतंकियों और अलगाववादियों के तमाम टोटके फेल हो गए। सोपोर में पिछले चुनाव में सिर्फ 19.95 प्रतिशत वोट पड़े थे। इस बार यह रिकार्ड टूट गया। इस बार दो बजे दिन तक ही इस क्षेत्र में 25 प्रतिशत से अधिक मतदान हो चुका था।

तीसरे दौर में भी वोटों की झड़ी लगी

रियासती विधानसभा के लिए तीसरे दौर के मतदान में मतदाताओं ने अपने जोश और जिद से आतंकियों और अलगाववादियों के लिए मुंह छुपाने को भी जगह नहीं छोड़ी। पहले दो चरणों की तरह इस बार भी जमकर वोट बरसे। इस दौरान कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।

गुलमर्ग के एक मतदान केंद्र पर पेट्रोल बम फेंका गया जिसमें कोई नुकसान नहीं हुआ। तीसरे दौर की 16 सीटों पर औसतन 58 फीसदी वोट पड़े जो इन सीटों पर 2008 में हुए मतदान के मुकाबले करीब आठ फीसदी ज्यादा है। इनमें से 11 सीटों पर तो मतदान ने पिछले कई चुनावों के रिकार्ड तोड़ दिए।

काबिले गौर हकीकत यह है कि दहशतगर्दों ने जहां-जहां आतंकी वारदातों और धमकियों के जरिये वोटर को डराने की कोशिश की वहां-वहां जनता का जोश और अधिक जोर पकड़ता गया। तीसरे दौर की सभी सीटें कश्मीर संभाग की हैं। इनमें से भी अधिकतर इलाके वे हैं जहां आतंकी और अलगाववादी सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं।
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अलगाववादियों को मुंह छुपाने की जगह भी नहीं छोड़ी

मतदान से ठीक पहले पाकिस्तानी घुसपैठियों और आतंकी तंजीमों ने इन इलाकों को दहलाने की हर मुमकिन साजिश को अंजाम देने की कोशिश की। मंगलवार को सबसे ज्यादा 82.14 प्रतिशत मतदान चरारे शरीफ में और सबसे कम 30 प्रतिशत मतदान सोपोर में हुआ।

खास बात यह है कि हुर्रियत के गढ़ सोपोर में पिछले चुनाव के मुकाबले डेढ़ गुने से भी अधिक मतदान हुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के चुनाव क्षेत्र वीरवाह में 74.14 फीसदी वोट पड़े। यह आंकड़ा 2008 की तुलना में 18 प्रतिशत ज्यादा है।

कश्मीर में कड़ाके की ठंड और हड्डियों को चीर देने वाली सर्द हवाएं भी हमलों और धमकियों को मुंहतोड़ जवाब देने की ठान चुके मतदाताओं के कदमों को ठिठका नहीं सकीं। इसी जज्बे के चलते कई विधानसभा क्षेत्रों में तो दोपहर होते-होते पिछला रिकार्ड ध्वस्त हो चुका था।

मतदाताओं में बहुत बड़ी तादाद युवाओं की थी। इनमें महिलाओं की लंबी-लंबी कतारें जम्हूरियत के जश्न को और भी असरदार बना रहीं थीं। तीसरे दौर की 16 सीटों पर 1369102 मतदाताओं के लिए 1781 मतदान केंद्र बनाए गए थे। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

मतदान केंद्रों को सुरक्षा बलों ने अपने कब्जे में ले रखा था। मॉडल पोलिंग बूथों को रंग बिरंगे झंडों से सजाया गया था। यहां मतदाताओं के लिए चाय-कॉफी के साथ ही बैठने का भी इंतजाम था। सभी स्थानों पर पर्यवेक्षकों ने दौरा कर वोटिंग की स्थिति की जानकारी ली।
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