सड़कों पर सन्नाटा। अघोषित कर्फ्यू जैसा। शांति के प्रतीक कबूतरों को खुलकर बिचरने का मौका श्रीनगर में अक्सर मिल जाता है। कभी अलगाववादियों की हड़ताल और कभी आतंकवादियों की गरजती बंदूकें आम आदमी को घरों में दुबकने को मजबूर कर देती है और सड़कों के किनारे खड़ी अट्टलिकाओं की छतें शांति के प्रतीक कबूतरों का बसेरा बन जाती हैं।
रविवार की रात से ही श्रीनगर आने वाली सड़कों को सील कर दिया गया था। पंथा चौक से ही हर वाहन को हाईवे की ओर मोड़ दिया गया। अलगाववादियों के बंद और आतंकवादियों के हमले के दौरान हर बार श्रीनगर तलाशी के लिए मजबूर होता रहा है लेकिन पहली बार सीलबंदी ऐसी की गई कि लोग रविवार की शाम छह बजे के बाद शहर में दाखिल होने को तरस गए।
पंथा चौक से डल गेट तक एक दर्जन चेकपोस्ट बने। हर शख्श का स्कैन हो रहा था। तीन दिन पहले पाकिस्तानी आतंकवादियों ने उड़ी कैंप पर फिदायीन हमला किया और रैली के एक दिन पहले पुलवामा में सीआरपीएफ कैंप पर हमला हुआ।
आतंकवादी अपनी खीज उतार रहे थे। प्रधानमंत्री की रैली इन तमाम चुनौतियों को धता बताते हुए पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार करने के लिए पूरे श्रीनगर को फैजी छावनी में बदल दिया गया।