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विधायक पहली बार रखेंगे विस में कदम

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा नवनिर्वाचित सदस्यों के स्वागत के लिए तैयार है। यह पहला अवसर होगा, जब विधानसभा के लिए चुने गए 87 सदस्यों में से 56 पहली बार सदन में कदम रखेंगे।
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सिर्फ 31 ऐसे सदस्य हैं, जिन्हें विधानसभा की कार्यप्रणाली का पूर्व अनुभव है। अनुभवी 31 सदस्यों में से 26 पिछली बार भी विधायक थे। उन्होंने अपनी सदस्यता को बरकरार रखा, जबकि पांच विधायकों ने छह साल बाहर रहने के बाद फिर से वापसी की है।

आंकड़ों की दृष्टि से देखा जाए तो नेशनल कांफ्रेंस के दो सदस्यों ने छठी बार जीत हासिल कर अपने ही सीनियर व पिछले वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर के रिकार्ड की बराबरी की है। जिन्होंने चरार-ए-शरीफ का 37 साल प्रतिनिधित्व किया, जबकि इस बार उन्हें पीडीपी के गुलाम नबी लोन के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा।
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भाजपा के 25 में से 22 ने पहली बार चुनाव जीता

इसके साथ ही यह पहला अवसर होगा, जब भाजपा के रिकार्ड 25 सदस्य सदन में रखेंगे। इनमें से 22 विधायक पहली बार सदन का कार्यप्रणाली का हिस्सा बनने जा रहे हैं। इसी तरह इस बार सबसे ज्यादा 28 सीटें हासिल करने वाली पीडीपी की टीम में भी 19 नए चेहरे शामिल हैं।

कांग्रेस की ओर से चुने गए 12 सदस्यों में भी आधे, यानी छह सदस्य पहली बार विधानसभा चुनाव जीते हैं। इसके अलावा नेशनल कांफ्रेंस के पांच और पीपुल्स कांफ्रेंस के दो सदस्या पहली बार चुने गए हैं। यानी कोई भी ऐसा दल नहीं बचा, जिसमें बड़ी संख्या में नए चेहरे न हों।

दो आजाद उम्मीदवार पवन कुमार गुप्ता और सईद बकीर रिजवी भी पहली बार सदन में सदस्य के रूप में शिरकत करेंगे। नए चेहरों में कई बड़ी शख्सियतें भी शामिल हैं। इनमें बैंकर से राजनीतिज्ञ बनने वाले पीडीपी के हसीब द्राबु, बिजनेसमैन अल्ताफ बुखारी और मुख्यमंत्री के करीबी दोस्त व बिजनेसमैन देवेंद्र राणा प्रमुख हैं।
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