48 बेड, पर मरीज 100 से अधिक
मरीजों के ओवरलोड से हांफ रहा एसएमजीएस अस्पताल
जिला स्तर से रेफर सिस्टम से लेबर रूम में हालात बदहाल
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू।
एसएमजीएस अस्पताल का लेबर रूम... एक बेड पर दो से तीन मरीज। बेड के लिए जद्दोजहद और मारामारी की स्थिति। कॉरिडोर में तीमारदारों का जमावड़ा। जिला स्तर से रेफर सिस्टम पर अंकुश नहीं लग पाने से इस अस्पताल के लेबर रूम की हालत ऐसी ही है। अस्पताल में विभिन्न वार्डों में कुल 750 बेड हैं।
मरीजों के ओवरलोड से हांफ रहे लेबर रूम के 48 बेड पर सौ से अधिक मरीजों को एक समय चिकित्सा दी जाती है। ऐसी परिस्थितियों में चिकित्सा स्टाफ के भी पसीने छूट रहे हैं। उन्हें मरीजों को चिकित्सा देने के साथ ओवरलोड से उपजी अव्यवस्थाओं से लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।
एसएमजीएस अस्पताल के लेबर रूम में रोजाना औसतन 60-70 प्रसव (डिलीवरी) के मामले हो रहे हैं। 13 सितंबर 2017 को चौबीस घंटे में रिकार्ड 84 प्रसव करवाए गए थे। इसी तरह दिसंबर 2017 में 1995 मामलों में 1199 सामान्य और 796 सर्जरी तथा जनवरी 2018 में 2038 मामलों में से 1255 सामान्य और 783 सर्जरी से प्रसव करवाए गए। लेबर रूम में 30 के करीब सीजेरियन (सर्जरी) से प्रसव करवाए जा रहे हैं। मजेदार बात यह है कि रोजाना जिला स्तर से 25-30 प्रसव के मामले रेफर होकर यहां पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकांश में सामान्य प्रसव किया जाता है। खासतौर पर दोपहर बाद जिला अस्पतालों से रेफर सिस्टम की बाढ़ लग जाती है। छोटी सी बीमारी के लिए भी मरीज को शहरी अस्पतालों में भेजा जा रहा है। इससे ओवरलोड के चलते मरीजों को उचित चिकित्सा नहीं मिल पा रही है। अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या के आगे बेड कम पड़ रहे हैं। एक ही बेड पर कई मरीज रहने से संक्रमण फैलने की आशंका ज्यादा रहती है।
स्वास्थ्य विभाग ने कुछ समय पूर्व रेफर सिस्टम पर अंकुश लगाने के लिए कुछ नई व्यवस्था को अमल में लाया था, लेकिन ऐसी व्यवस्थाएं फिर दम तोड़ गई हैं।
लेबर रूम के एक्सटेंशन को डीपीआर बनाई : अधीक्षक
एसएमजीएस अस्पताल के अधीक्षक डा. आरके सांगड़ा का कहना है कि लेबर रूम के एक्सटेंशन के लिए 192 बेड की डीपीआर बनाई गई है। इसके अलावा गायनी के बेडों को भी दोगुना करने के प्रस्ताव पर काम हो रहा है। रेफर सिस्टम को रोकने के लिए गायनी यूनिट की ओर से स्वास्थ्य निदेशालय को नियमित लिखा जाता है। उम्मीद है कि नए प्रोजेक्टों पर शीघ्र काम शुरू हो जाएगा।
सरवाल अस्पताल में डाक्टरों की कमी
जम्मू। शहर के प्रमुख सरवाल अस्पताल में डाक्टरों का टोटा बना हुआ है। पिछले दिनों विभिन्न यूनिट से अटैच डाक्टरों को डिटैच किया गया था, जिससे खासतौर पर गायनी में सिर्फ दो ही डाक्टर रह जाने से अब दिन में एक ही प्रसव का मामला हो रहा है, जबकि अन्य मरीजों को एसएमजीएस या दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इससे पहले गायनी यूनिट में पांच डाक्टर थे, जिससे दिन में 7-8 तक प्रसव के मामले हो जाते थे। दो ही गायनी विशेषज्ञों के रह जाने से एक ओपीडी या एक इमरजेंसी में ही रहता है। अस्पताल में यह हालत एक माह से है।