हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एन पाल वसंथाकुमार ने कहा है कि लोगों को तेजी से न्याय दिलाने के लिए लंबित मामलों के निपटारे को प्रभावी तंत्र की व्यवस्था करनी होगी।
‘देरी और लंबित समस्या तथा उसका समाधान : रणनीति व निर्देश’ पर हाईकोर्ट कांप्लेक्स में आयोजित एकदिवसीय वर्कशाप का उद्घाटन करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि विभिन्न स्तर पर प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करने की जरूरत है।
खासकर पीठासीन न्यायाधीशों को न्याय में देरी के कारणों के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे, ताकि बैकलॉग क्लीयर किया जा सके। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रधान जिला जजों को अपने अधीन कोर्टों का लगातार जायजा लेना होगा, ताकि केसों के लंबित होने के मामले रोके जा सकें।
उन्होंने कहा कि आज की वर्कशाप का आयोजन कुछ खास उद्देश्यों के साथ किया गया है। इसमें लंबित केसों के निपटारे, खासकर पांच साल से ज्यादा समय से लंबित केसों को हल करने के सुझाव दिए जाएंगे। लंबित मामलों को हल करने के लिए जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट संस्थागत प्रयास करेगा।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लंबित केसों के हल के लिए जम्मू-कश्मीर में 38 नई विशेष मोबाइल अदालतें बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि नोटिस जारी नहीं किया जाना भी केसों के समय पर निपटारा न होने का कारण है। इस मसले पर भी पीठासीन जजों को पैनी नजर रखनी होगी।