सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान जिले में बदहाल स्थिति में है। हालत यह है कि इन दोनों अभियानों के तहत जिलों में लगाए गए शिक्षकों को कई महीनों से वेतन ही नहीं मिला है।
ऐसे में स्कूलों में बिना वेतन के लिए अपना कार्य कर रहे हैं। शिक्षक बार बार राज्य सरकार को इसके लिए जिम्मेदार मान रहे हैं दूसरी तरफ विभाग जो तस्वीर पेश कर रहा है वह कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
जिला शिक्षा विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार विभाग ने राज्य सरकार के जरिये केंद्र सरकार को एक साल में चार बार लिखित में कहा है कि उन्हें शिक्षकों के वेतन के लिए पैसा चाहिए है लेकिन केंद्र सरकार द्वारा अभी तक पैसा नहीं भेजा गया है।
एसएसए और रमसा में तैनात हैं सैकड़ों शिक्षक
जिला शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में एसएसए और रमसा के तहत 350 शिक्षकों को तैनात किया गया है।
इन शिक्षकों को लेकिन कई महीनों से वेतन नहीं मिला है। एसएसए शिक्षकों को जहां आठ महीनों से तो रमसा के तहत चार महीनों से शिक्षकों को वेतन नहीं मिला है।
दोनों योजनाओं के तहत केंद्र सरकार को अभी कठुआ जिला के लिए 28 करोड़ रुपये की ग्रांट को मंजूरी देनी है लेकिन एक साल से ऐसा न करने से हर महीने एक करोड़ से कुछ अधिक की ग्रांट बढ़ जाती है।
एक दूसरे पर टाल रहे राज्य और केन्द्र सरकार
वर्तमान में केंद्र सरकार को एसएसए के तहत 24 करोड़ रुपये और रमसा के तहत चार करोड़ रुपये देने हैं। वहीं बिना वेतन के कार्य कर रहे शिक्षकों ने एक महीने से सरकार के खिलाफ उग्र रुख अपना लिया है। एक महीने के अंदर ही विभिन्न शिक्षक संगठनों ने 11 बार प्रदर्शन और बैठक कर सरकार को कोसा है।
इसके साथ ही हालिया चेतावनी में शिक्षक संगठनों ने साफ कहा है कि अगर रक्षाबंधन से पूर्व उनका बकाया वेतन नहीं दिया जाता है तो वह सरकार का घेराव करेंगे।
दूसरी ओर कठुआ के सीईओ जेके सूदन के अनुसार विभाग की ओर से राज्य सरकार और केंद्र सरकार तक बकाया राशि का ब्योरा भिजवा दिया गया है। कुल 28 करोड़ रुपये केवल शिक्षकों के बकाया वेतन को पूरा करने के लिए चाहिए।