उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि बिजली परियोजनाएं 40 साल बाद व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए पूरी तरह से जम्मू-कश्मीर को वापस मिल जाएंगी। इससे पूर्व एनएचपीसी को जो प्रोजेक्ट दिए गए, उनमें परियोजनाओं को लौटाने का प्रावधान नहीं था। 2024 तक जम्मू कश्मीर में बिजली उत्पादन दोगुना हो जाएगा।
उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बिजली उत्पादन की क्षमता 14867 मेगावाट की है। अभी तक केवल 3504 मेगावाट ही हासिल किया जा सका है। 3498 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं अगले तीन से चार साल में शुरू होने से जम्मू-कश्मीर बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएगा। उपराज्यपाल ने कहा कि एनएचपीसी को सावलकोट प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए काम दिया गया है। 1984 में यह परियोजना शुरू हुई थी लेकिन अधर में लटकी रही। इससे 1856 मेगावाट पन बिजली उत्पादन होगा।