पुंछ। केंद्र व राज्य सरकार के आम लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लाख दावे करे, जमीन हालात बिल्कुल अलग ही कहानी बयां करते हैं। आजादी के सत्तर वर्ष बीत जाने के बाद भी जिले की मंडी तहसील में बसे पहाड़ी गांव मारकोट में पक्की सड़क न होने से गर्भवती महिलाओं और मरीजों को चारपाई से अस्पताल ले जाना पड़ता है। इतना ही नहीं गांव के दसवीं कक्षा से आगे पढ़ने वाले लड़के लड़कियों को हर दिन कई किलोमीटर पैदल चल कर मंडी अथवा लोरन हायर सेकेंडरी स्कूल जाना पड़ता है।
गांव केे निवासियों शबीर हुसैन, अरशद हुसैन, इफ्तकार अहमद, नजीर लोन, सुबाना आदि का कहना है कि प्रशासन व सरकार की तरफ से करीब दस साल पहले मंडी लोरन मार्ग पर स्थित बराछड़ से मारकोट के लिए सम्पर्क सड़क बनाई जाने लगी थी। इसका नींव पत्थर तत्कालीन नेकां विधायक ने रखा था, लेकिन इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी गांव तक पूरी सड़क नहीं बन पाई है। जहां तक कटाई हुई है वहां तक सड़क पक्की न किए जाने के कारण गांव में वाहन नहीं आते हैं। ऐसे में राशन, सब्जी उठा कर घर तक लाना पड़ता है। बीमारों को अस्पताल पहुंचाने में बड़ी मुश्किलें पेश आती हैं। बीमारों को कंधों पर उठा कर गांव से 10 किलोमीटर दूर ले जाना पड़ता है। वहां से अस्पताल पहुंचाने में कई बार बीमार बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि जल्दी से गांव तक पक्की सड़क का निर्माण करवाया जाए, ताकि वे भी अपने घरों तक वाहनों में बैठ कर आवाजाही कर पाएं और बीमार लोगों को समय रहते अस्पताल पहुंचा पाएं।