मेंढर/पुंछ। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जम्मू-कश्मीर को खूनखराबे के दौर से बाहर निकालने की अपील की है। उन्होंने सीमावर्ती इलाकों को गोलाबारी के दौर से निकालने के लिए बातचीत तथा सुलह की प्रक्रिया शुरू करने पर जोर दिया। कहा कि दोनों देश इस मुश्किल का कोई स्थायी हल निकालें ताकि सीमा पर रहने वाले लोग अमन चैन की जिंदगी जी सकें और पूरी रियासत में शांति स्थापित हो सके।
पाक की गोलाबारी में रविवार को मारे गए एक ही परिवार के पांच सदस्यों के परिजनों से मिलकर सांत्वना देने के बाद उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीमा पर रहने वाले पुंछ, नौशेरा, आरएस पुरा, उड़ी, करनाह आदि के लोग गोलाबारी की भारी कीमत चुका रहे हैं। प्रधानमंत्री को आगे आकर जम्मू-कश्मीर में शांति एवं सामान्य जनजीवन की व्यवस्था बहाल करने की दिशा में पहल करनी चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान के नेतृत्व से भी अपील की कि वह भारत के साथ शांति व सुलह की प्रक्रिया शुरू करने की पहल करे। महबूबा ने कहा कि पिछले कई युद्धों से तबाही व मौतों के सिवाय कुछ नहीं हासिल हुआ है।
उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में किए गए प्रयासों से सीमाओं पर दीर्घावधि शांति और राज्य के भीतर सुलह के माहौल को याद किया। उन्होंने कहा कि, इसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लाहौर जाने का साहसिक कदम उठाया, लेकिन दुर्भाग्य से पठानकोट जैसी घटनाओं ने इस प्रक्रिया को रोक दिया। उन्होंने कहा कि जब वह प्रधानमंत्री से मिली थीं तो उन्होंने एक बड़े भाई की तरह शांतिपूर्ण संवाद के लिए पाकिस्तान को मनाने और गरीबी, बेरोजगारी और अभाव के खिलाफ संयुक्त रूप से काम करने की अपील की।
महबूबा ने लोगों को आश्वासन दिया कि वे भी पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की तरह सीमाओं के साथ और दोनों देशों के बीच शत्रुता की समाप्ति की वकालत करती रहेंगी। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह, राहत, पुनर्वास व आपदा प्रबंधन मंत्री जावेद मुस्तफ ा मीर, विधायक शाह मोहम्मद तांत्रे, चौधरी कमर और यशपाल शर्मा उपस्थित थे।
राज्य के लोग कभी नहीं चाहते थे विभाजन
देश के विभाजन को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लोग कभी भी विभाजन नहीं चाहते थे, लेकिन दुर्भाग्यवश इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। गोलाबारी में मारे गए लोगों पर कहा कि इन पांच व्यक्तियों या इस बुजुर्ग मां की गलती क्या थी। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है जब लोग कहीं बेहतर सुविधाएं मांग रहे हैं तो राज्य के सीमावर्ती इलाकों के लोग बंकरों की मांग कर रहे हैं। यह कब्र से कम नहीं है क्योंकि विकास और प्रगति के प्रोत्साहन केवल उन्हीं के लिए फ ायदेमंद हैं।
सीमावर्ती निवासी देश की पहली रक्षा पंक्ति
देश की पहली रक्षा पंक्ति के रूप में सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों को बताते हुए उन्होंने कहा कि यह वे लोग हैं, जिन्होंने राज्य और देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने आईआरपी की दो बटालियन बनाई हैं, जिसमें सीमांत क्षेत्रों के लोगों का समावेश है। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि रोजगार के अवसर बनाने, स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने और सड़क संपर्क सहित उन सभी के लिए जो भी संभव होगा किया जाएगा।